गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने वाली हैं और जुलाई से स्कूल फिर से खुलने जा रहे हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश का परिवहन विभाग एक सख्त और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। 1 जुलाई से प्रदेश भर में स्कूल बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर ले जाने वाले वाहन पूरी तरह से सुरक्षित हों और सरकार द्वारा तय किए गए सभी मानकों का पालन कर रहे हों।
🔍 जांच अभियान के मुख्य बिंदु (किन बातों की होगी चेकिंग?)
परिवहन विभाग द्वारा चलाए जाने वाले इस सघन अभियान में बसों और उनके चालकों की गहन जांच की जाएगी। इसके तहत निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
- तकनीकी और फिटनेस जांच: बसों की तकनीकी स्थिति, बॉडी की संरचना और बॉडी चेसिस माउंटिंग टेस्ट (Body Chassis Mounting Test) की बारीकी से जांच होगी।
- सुरक्षा मानक: बस की छत निर्धारित भार मानक के अनुसार मजबूत है या नहीं, इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा, बच्चों के बैठने के लिए सीट और एंकरेज टेस्ट भी किए जाएंगे।
- आपातकालीन द्वार (Emergency Exit): किसी भी विपरीत परिस्थिति या दुर्घटना के समय बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बस के आपातकालीन गेट की स्थिति को भी परखा जाएगा।
- चालकों का सत्यापन: केवल बसों की ही नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाले चालकों (Drivers) का भी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वाहन योग्य हाथों में है।
- रंग और स्पष्ट पहचान: अभियान के दौरान यह कड़ाई से देखा जाएगा कि स्कूल बसें अनिवार्य रूप से 'गोल्डन येलो' (सुनहरे पीले) रंग में रंगी हों और उन पर स्पष्ट रूप से 'स्कूल बस' (School Bus) लिखा हो।
🗣️ स्कूल परिवहन को पारदर्शी बनाना है लक्ष्य
इस विशेष अभियान को लेकर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि इस मुहिम का लक्ष्य केवल नियमों को लागू करना नहीं है, बल्कि पूरी स्कूल परिवहन प्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अभियान के दौरान इस बात की सख्त निगरानी की जाएगी कि स्कूल बसों के संचालन में सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन हो रहा है या नहीं।
परिवहन विभाग की यह पहल अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। इससे न केवल स्कूली बच्चों का सफर सुरक्षित बनेगा, बल्कि मनमानी करने वाले स्कूल प्रबंधनों पर भी लगाम लगेगी। 1 जुलाई से शुरू हो रहे इस अभियान के चलते स्कूलों को अब अपने वाहनों की फिटनेस हर हाल में दुरुस्त रखनी होगी।


