प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और मातहत महिला कर्मचारी के मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। कार्यालय शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा कन्नौज जनपद के सौरिख विकास खंड में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) श्री विश्वनाथ पाठक को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, रिश्वतखोरी और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
यह आदेश अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामता राम पाल द्वारा जारी किया गया है। यह कार्रवाई प्राथमिक विद्यालय, पिपरिया की प्रधानाध्यापिका श्रीमती कल्पना पाल द्वारा दी गई लिखित शिकायत और शपथ पत्र के आधार पर की गई है। आरोपी अधिकारी के खिलाफ सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 के उल्लंघन और अनैतिक कार्यों से विभाग की छवि धूमिल करने के प्राथमिक आरोप सही पाए गए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और 20 प्रतिशत कमीशन की मांग
प्राप्त विवरण के अनुसार, दिसंबर 2025 में प्राथमिक विद्यालय पिपरिया को मरम्मत कार्य हेतु 4,62,796/- रुपये की सरकारी धनराशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि इस धनराशि के जारी होने के बाद से ही खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक द्वारा प्रधानाध्यापिका कल्पना पाल पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 20 प्रतिशत (लगभग 92,000 रुपये) की अवैध राशि रिश्वत के रूप में देने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
शिक्षिका के मना करने पर अधिकारी द्वारा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और लगातार परेशान करने का सिलसिला शुरू कर दिया गया। 25 मार्च 2026 को बीईओ ने एक शिक्षामित्र के साथ स्कूल पहुंचकर जबरन उपस्थिति रजिस्टर सीज कर दिया और शिक्षिका को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने धमकी देते हुए कहा था कि, "20 प्रतिशत में मेरा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सर और डी०सी० पीयूष सभी का हिस्सा रहेगा, जब तक पैसे नहीं दोगी तब तक कमियां निकाली जाएंगी।"
मातृत्व अधिकारों का हनन: 4 बार निरस्त किया बाल देखभाल अवकाश (CCL)
शिकायतकर्ता महिला शिक्षिका के अनुसार, रिश्वत न देने की खुन्नस में बीईओ और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कन्नौज ने मिलकर साजिश रची। शिक्षिका द्वारा आवेदित बाल देखभाल अवकाश (Child Care Leave) को दुर्भावनापूर्ण तरीके से 4 बार निरस्त किया गया ताकि उन्हें सेवा में अनुपस्थित दिखाकर निलंबित किया जा सके:
- पहला आवेदन (12.04.2026): अवधि 15.04.2026 से 14.05.2026 तक थी, जिसे बीएसए कंट्रोल रूम से फोन करवाकर जबरन अनुपस्थित दिखाकर निरस्त किया गया।
- दूसरा आवेदन (15.04.2026): अवधि 16.04.2026 से 15.05.2026 तक थी, जिसे रात 9:50 बजे जानबूझकर निरस्त किया गया।
- तीसरा और चौथा आवेदन: इन्हें भी दुर्भावना के तहत रात में ही निरस्त किया गया और शिक्षिका को जानबूझकर अनुपस्थित दिखाया गया।
यही नहीं, 22 अप्रैल 2026 को जब प्रधानाध्यापिका आकस्मिक अवकाश पर थीं, तब बीईओ द्वारा पूरी टीम के साथ विद्यालय में छापा मारा गया और वहां उपस्थित सहायक अध्यापकों को डराकर प्रधानाध्यापिका को निलंबित करने की धमकी दी गई। साथ ही, बीआरसी (Block Resource Centre) पर बुलाकर बीईओ द्वारा अहंकारपूर्वक कहा गया कि, "मैडम आप मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं, आजकल पैसे से किसी भी अधिकारी को खरीदा जा सकता है।"
कड़ा प्रशासनिक एक्शन: तत्काल प्रभाव से निलंबन और विभागीय जांच
निदेशालय द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण का संतोषजनक जवाब न देने पर प्रशासन ने इसे बेहद गंभीर माना। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि श्री विश्वनाथ पाठक का कृत्य 'उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956' के विरुद्ध है। इसके तहत उन्हें 'उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999' के नियम-4 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें कार्यालय, मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर मण्डल, कानपुर से सम्बद्ध किया गया है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच हेतु मण्डलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, कानपुर मण्डल को पदेन जांच अधिकारी नामित किया गया है, जो नियम-7 के तहत आगे की कड़े अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट | प्रयागराज / कन्नौज




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