महानिदेशक श्रीमती मोनिका रानी, निदेशक श्री अनिल भूषण चतुर्वेदी और सचिव श्री सुरेंद्र तिवारी के हवाले से यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है कि जिन दंपति शिक्षकों का वर्तमान पारिवारिक और व्यावसायिक जीवन सुचारू रूप से चल रहा है, उन्हें इस बार स्थानांतरण के लिए आवेदन करने से बचना चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि बिना सोचे-समझे किया गया एक आवेदन आपकी वर्तमान व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
इस बार की स्थानांतरण नीति में व्यक्तिगत इच्छा या सुविधा से ज्यादा शिक्षक-छात्र अनुपात (Pupil-Teacher Ratio) को प्राथमिकता दी जा रही है।
- नियम क्या है? यदि पति या पत्नी में से कोई एक भी ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है, तो विभाग सबसे पहले संबंधित जनपदों में शिक्षकों की उपलब्धता और कमी का आकलन करेगा।
- कार्रवाई: आवेदनकर्ता को उसकी मनपसंद जगह देने के बजाय, उस जनपद या विद्यालय में भेजा जाएगा जहाँ शिक्षकों की भारी कमी है और बच्चों की संख्या के मुकाबले शिक्षक कम हैं।
विभागीय चर्चाओं और प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया को पूरी तरह से सरकारी आदेश (GO) के नियमों के तहत ही संचालित किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर और तय नियमों के आधार पर होगी, जिसमें किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत अनुरोध या ढील की गुंजाइश नहीं होगी।
दंपति शिक्षकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अगर आप आवेदन करने का मन बना रहे हैं, तो इन तीन स्थितियों का आकलन जरूर कर लें:
- इच्छा नहीं, आवश्यकता सर्वोपरि: सरकार स्थानांतरण आपकी पसंद के जिले में करने के बजाय उस स्थान पर कर सकती है जहाँ प्रशासनिक रूप से शिक्षकों की जरूरत ज्यादा है।
- दूरी बढ़ने का जोखिम: संभव है कि आवेदन करने के बाद पति-पत्नी के बीच की दूरी घटने के बजाय और बढ़ जाए, यदि रिक्तियां किसी दूरस्थ क्षेत्र में हुईं।
- पूरी जानकारी के बाद ही कदम उठाएं: आवेदन फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करने से पहले अपने ब्लॉक और जनपद की रिक्तियों (Vacancies) का डेटा अच्छी तरह समझ लें।


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