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8th Pay Commission: विभिन्न लेवल के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर? जानें किसे फायदा, किसे नुकसान

Sir Ji Ki Pathshala

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अपडेट सामने आया है। इस बार कर्मचारी संगठनों द्वारा एक ऐसे मॉडल की मांग की जा रही है, जो यदि लागू होता है, तो विभिन्न लेवल के कर्मचारियों के वेतन ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

​यह नया प्रस्ताव अलग-अलग वेतन स्तर (Pay Levels) के लिए मल्टीपल फिटमेंट फैक्टर (Multiple Fitment Factor) लागू करने से जुड़ा हुआ है।

​क्या है नया प्रस्ताव और किसने की मांग?

​आमतौर पर हर 10 साल में नए वेतन आयोग का गठन होता है। इस बार 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और कर्मचारी संगठन सरकार को अपने-अपने मेमोरेंडम (ज्ञापन) सौंप रहे हैं।

8th pay commission fitment factor calculation table

​इसी कड़ी में भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ द्वारा सरकार के समक्ष 'मल्टीपल फिटमेंट फैक्टर' की मांग रखी गई है। अभी तक के वेतन आयोगों (जैसे 7वें वेतन आयोग) में सभी स्तर के कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता था। लेकिन इस बार संघ का सुझाव है कि वेतन संरचना में संतुलन बनाने और सभी वर्गों को न्याय दिलाने के लिए इसे स्तरवार (Level-wise) अलग-अलग किया जाना चाहिए।

​संघ के अनुसार, फिटमेंट फैक्टर को 3.25, 3.833 या 4.0 के बीच तय करने पर सहमति बन सकती है।

​फिटमेंट फैक्टर का प्रस्तावित फॉर्मूला: किसे कितना फायदा?

​इस नए मॉडल की सबसे खास बात यह है कि इसमें "प्रगतिशील फिटमेंट फैक्टर" की वकालत की गई है, यानी निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए उच्च फिटमेंट फैक्टर और उच्च स्तर के अधिकारियों के लिए कम फिटमेंट फैक्टर।

​प्रस्तावित मेमोरेंडम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. लेवल 1 (न्यूनतम वेतन स्तर): निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 4.0 रखने का प्रस्ताव है। इसके तहत वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹72,000 तक पहुँच सकता है, जो कि न्यूनतम वेतन में लगभग 4 गुना की वृद्धि होगी।
  2. मध्यम स्तर (लेवल 2 से 10): इनके लिए फिटमेंट फैक्टर को संतुलित (जैसे 3.25 या 3.833) रखने की बात कही गई है, जिससे मध्यम वर्ग के कर्मचारियों को भी बेहतर वेतन वृद्धि का लाभ मिल सके।
  3. उच्च स्तर (लेवल 18/हायर अधिकारी): शीर्ष स्तर के अधिकारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर को न्यूनतम 2.0 रखने का प्रस्ताव है, जिससे उनके वेतन में लगभग 2 गुना की वृद्धि होगी।

​फायदा और नुकसान का विश्लेषण

  • फायदा (निचले और मध्यम वर्ग को): यदि सरकार इस फॉर्मूले को स्वीकार करती है, तो सबसे अधिक लाभ ग्रुप 'सी' और 'डी' जैसे निचले और मध्यम वेतनमान वाले कर्मचारियों को मिलेगा। इससे अमीर और गरीब कर्मचारियों के वेतन के बीच का अंतर कम होगा और आर्थिक संतुलन बनेगा।
  • नुकसान (उच्च स्तर के अधिकारियों को): समान फिटमेंट फैक्टर न होने के कारण उच्च स्तर के अधिकारियों को प्रतिशत के मामले में उतनी बड़ी उछाल नहीं मिलेगी, जितनी पूर्व के वेतन आयोगों में मिलती थी। हालांकि, उनका मूल वेतन पहले से ही अधिक होता है, इसलिए मौद्रिक रूप से उनका नुकसान नहीं होगा, लेकिन वृद्धि की दर कम रहेगी।

​क्या यह आधिकारिक फैसला है?

ध्यान दें: यह पूरी तरह से कर्मचारी संगठन (भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ) द्वारा दिया गया एक प्रस्तावित और अनुमानित मॉडल है। सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। आयोग सभी संगठनों के सुझावों पर विचार करने के बाद ही अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

​पुरानी पेंशन योजना (OPS) की भी उठ रही मांग

​वेतन वृद्धि के साथ-साथ देश भर के केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों की एक और बड़ी मांग पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme - OPS) को बहाल करने की है। कर्मचारियों का मानना है कि वेतन सुधारों के साथ-साथ सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षित जीवन के लिए ओपीएस लागू करना भी बेहद जरूरी है।

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