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NPS News: नियुक्ति तिथि से NPS कटौती पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, BSA ने शुरू की कार्रवाई

Sir Ji Ki Pathshala

NPS अंशदान मामला: हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद जागा विभाग, उन्नाव BSA ने दिए समयबद्ध कार्रवाई के आदेश

लखनऊ/उन्नाव। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में अंशदान की कटौती और राज्यांश जमा न किए जाने के एक गंभीर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय के सख्त आदेश के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) उन्नाव ने कोर्ट के आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।

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​यह मामला शिक्षक गणेश शंकर मिश्रा से जुड़ा है, जिनकी मार्च 2009 से अक्टूबर 2021 तक की लंबी अवधि का एनपीएस अंशदान न तो काटा गया और न ही सरकारी खजाने (राज्यांश) में जमा किया गया।

  • शासनादेश का उल्लंघन: याचिकाकर्ता के अनुसार, वह 13 फरवरी 2019 के शासनादेश के तहत एनपीएस कटौती का पूर्ण पात्र था।
  • विभागीय लापरवाही: बार-बार प्रार्थना पत्र देने और गुहार लगाने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे तंग आकर शिक्षक को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

​हाईकोर्ट का सख्त निर्देश: 3 महीने में लें निर्णय

​मामले की गंभीरता और तथ्यात्मक पहलुओं को देखते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने संबंधित प्राधिकारी को समय सीमा के भीतर काम करने का आदेश दिया है:

न्यायालय का आदेश: "याचिकाकर्ता द्वारा प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तिथि से अधिकतम तीन माह के भीतर लंबित प्रत्यावेदन पर एक कारणयुक्त (Speaking Order) आदेश पारित किया जाए। साथ ही, इस निर्णय की सूचना याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।"

​इस निर्देश के साथ ही माननीय न्यायालय ने याचिका का निस्तारण कर दिया है।

​कोर्ट के आदेश के बाद BSA उन्नाव की त्वरित कार्रवाई

​हाईकोर्ट के डंडे के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) उन्नाव ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है।

  • प्राथमिकता पर काम: बीएसए ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक गणेश शंकर मिश्रा से संबंधित एनपीएस कटौती और अवशेष अंशदान (राज्यांश) की प्रक्रिया को शासनादेश के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
  • समयबद्ध समीक्षा: अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी आवश्यक अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण करें और तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि कोर्ट की अवमानना जैसी स्थिति न बने।

​कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों में बढ़ी उम्मीद की किरण

​इस फैसले का स्वागत करते हुए शिक्षक संगठनों और कर्मचारी संघों ने इसे एक मील का पत्थर बताया है।

महत्वपूर्ण प्रभाव: शिक्षा विभाग में ऐसे सैकड़ों शिक्षक और कर्मचारी हैं जिनकी एनपीएस कटौती या जमा संबंधी प्रक्रियाएं विभागीय लापरवाही के कारण वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं। इस ऐतिहासिक आदेश के बाद अब उन सभी पीड़ित कर्मचारियों को भी न्याय और अपने हक का पैसा मिलने की उम्मीद जाग गई है।