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पुरानी नियुक्तियों पर TET अनिवार्यता के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक रुख, अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी!

Sir Ji Ki Pathshala

TET अनिवार्यता के खिलाफ पुरानी नियुक्तियों की बड़ी कानूनी लड़ाई: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को जारी किया नोटिस

लखनऊ: शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के तहत लागू की गई टीईटी (TET) अनिवार्यता के खिलाफ वरिष्ठ शिक्षक नेता पूर्णेश शुक्ल (महाकाल) और उनकी टीम के सतत प्रयासों को एक बड़ी न्यायिक सफलता मिली है। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने 2010 से पूर्व सेवा में आए शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए दायर की गई एक अत्यंत महत्वपूर्ण रिट याचिका पर ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए देश के सर्वोच्च विधिक अधिकारी, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया (AGI) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

Allahabad High Court Lucknow Bench Order Copy Writ A 4981 of 2026 Roma Verma vs Union of India regarding TET exemption for teachers appointed before 2010.

​रोमा वर्मा एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया: क्या है पूरा मामला?

​यह कानूनी संघर्ष 'रोमा वर्मा एंड 8 अदर्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य' (WRIT A 4981/2026) के माध्यम से माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से विद्वान अधिवक्ता हिमांशु राघव एवं दुर्गा प्रसाद शुक्ला ने पैरवी करते हुए शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23(2) की वैधानिकता को सीधे तौर पर चुनौती दी है।

​याचिका में मुख्य आधार यह बनाया गया है कि अधिनियम की धारा 23(2) का वर्तमान स्वरूप मूल अधिनियम की धारा 23(1) के सिद्धांतों के विपरीत (Ultra Vires) है। इसके साथ ही, यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता) का स्पष्ट उल्लंघन करता है। विशेषकर उन शिक्षक साथियों के मामले में जिनकी नियुक्तियां वर्ष 2010 में टीईटी नियमावली लागू होने से पहले की हैं, उन पर इसे जबरन थोपना उनके सेवा अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के सर्वथा विरुद्ध है।

​माननीय हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का सख्त आदेश

​इस गंभीर संवैधानिक प्रश्न पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति आलोक माथुर एवं माननीय न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिज़वी की खंडपीठ (Court No. 5) ने मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार किया। अदालत ने विपक्षी दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  1. काउंटर एफिडेविट का आदेश: माननीय न्यायालय ने सहायक सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (A.S.G.I.) और चीफ स्टैंडिंग काउंसिल (C.S.C.) को 3 सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट (जवाब) दाखिल करने का सख्त आदेश पारित किया है। इसके पश्चात याचिकाकर्ता टीम को 2 सप्ताह के भीतर अपना रिज्वाइंडर (प्रति-उत्तर) दाखिल करने का समय दिया गया है।
  2. अटॉर्नी जनरल को नोटिस: चूंकि इस याचिका में सीधे तौर पर अधिनियम के मूल प्रावधानों की वैधानिकता (Vires) को चुनौती दी गई है, अतः न्यायालय की डिवीजन बेंच ने इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए भारत के अटॉर्नी जनरल (Attorney General of India) को नोटिस जारी कर दिया है।
  3. अगली सुनवाई की तिथि: इस ऐतिहासिक मामले को त्वरित गति से निपटाने हेतु माननीय न्यायालय द्वारा 3 अगस्त, 2026 (3.8.2026) की डेट फिक्स कर दी गई है।

​2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के मान-सम्मान की लड़ाई

​शिक्षक संघ और संघर्ष समिति के नेतृत्वकर्ता पूर्णेश शुक्ल (महाकाल) ने इस आदेश पर हर्ष व्यक्त करते हुए सभी शिक्षक साथियों का हौसला बढ़ाया है। उन्होंने कहा: 

"हमारी टीम 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षक साथियों को टीईटी परीक्षा की इस विसंगतिपूर्ण अनिवार्यता से परमानेंट मुक्ति दिलाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। पूर्व में भले ही सैकड़ों रिव्यू पिटीशन्स के माध्यम से प्रतिकूल परिस्थितियां बनी हों, लेकिन कानून की मूल आत्मा और संवैधानिक अधिकारों को दी गई यह चुनौती मील का पत्थर साबित होगी। हमारा कार्य पूरी गति से और सही दिशा में गतिमान है, और हमें पूर्ण विश्वास है कि न्याय के मंदिर से अंततः जीत हमारे शिक्षक भाइयों और बहनों की ही होगी।"

सधन्यवाद एवं मंगलकामनाओं सहित,

आपका अपना,

पूर्णेश शुक्ल (महाकाल)

संपर्क सूत्र: 9794063018

Allahabad High Court Lucknow Bench Order Copy Writ A 4981 of 2026 Roma Verma vs Union of India regarding TET exemption for teachers appointed before 2010.