राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) अब एनपीएस के तहत एक ऐसी योजना लाने की तैयारी में है, जिससे निजी क्षेत्र (Private Sector) में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। इस नई पहल के तहत, भविष्य में कर्मचारियों को एक न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन (Minimum Assured Pension) देने का विकल्प तलाशा जा रहा है।
जोखिम और रिटर्न में संतुलन: सबसे बड़ी चुनौती
PFRDA के अध्यक्ष एस. रमन के मुताबिक, निजी क्षेत्र के लिए 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (UPS) जैसी गारंटीड योजना लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ऐसी योजना को अमलीजामा पहनाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें जोखिम (Risk) और रिटर्न के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
गारंटी के लिए चुकाना होगा मूल्य!
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि किसी योजना में 'निश्चित पेंशन' का वादा किया जाता है, तो उसकी गारंटी किसी न किसी संस्था को लेनी होगी। जैसे 'अटल पेंशन योजना' में सरकार गारंटी लेती है। यदि NPS में ऐसा किया जाता है, तो इसके तीन ही रास्ते होंगे:
- सरकार को वित्तीय सहयोग देना होगा।
- कर्मचारियों का मासिक योगदान (Contribution) बढ़ाना होगा
- या फिर मिलने वाले रिटर्न की उम्मीदों को थोड़ा कम करना होगा।
बाजार के भरोसे नहीं रहेगी पूरी पेंशन!
मौजूदा व्यवस्था में NPS पूरी तरह से मार्केट लिंक्ड (बाजार पर आधारित) है। इसका सीधा मतलब यह है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसा शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। यही कारण है कि नौकरीपेशा वर्ग लंबे समय से एक ऐसी सुरक्षित व्यवस्था की मांग कर रहा था, जिसमें बुढ़ापे में एक तय रकम की गारंटी मिल सके। PFRDA न केवल सुनिश्चित पेंशन पर काम कर रहा है, बल्कि निवेशकों को स्थिर रिटर्न देने के लिए निवेश के नए रास्ते भी तलाश रहा है।
रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ रहा है NPS का दायरा
देश में सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है, जिसका असर आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है। चालू वित्त वर्ष में एनपीएस ग्राहकों की संख्या में 22 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक एनपीएस से जुड़े कुल ग्राहकों की संख्या 2.17 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जबकि कुल पेंशन कोष (AUM) बढ़कर 15.95 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
निवेश के नए ग्लोबल तरीके अपनाएगा भारत
वर्तमान में NPS का पैसा मुख्य रूप से इक्विटी (शेयर), कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों में लगाया जाता है। लेकिन अब PFRDA वैश्विक पेंशन फंड्स की तर्ज पर भारत में भी निवेश के दायरे को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। आने वाले समय में निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने के लिए NPS का पैसा इन क्षेत्रों में भी लगाया जा सकता है:
- इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा परियोजनाएं)
- रियल एस्टेट (अचल संपत्ति से जुड़े निवेश)
- प्राइवेट डेट (निजी ऋण बाजार)
निष्कर्ष: क्यों जरूरी है यह बदलाव?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के निजी क्षेत्र में एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है, जिसके पास रिटायरमेंट के बाद आजीविका चलाने का कोई ठोस साधन नहीं होता। यदि PFRDA अपनी इस 'गारंटीड पेंशन योजना' को लागू करने में सफल रहता है, तो यह देश के करोड़ों प्राइवेट कर्मचारियों के लिए एक बेहतरीन सामाजिक सुरक्षा कवच साबित होगा।


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