यूपी शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा: सीतापुर में 7 शिक्षकों के TET सर्टिफिकेट फर्जी, पीएनपी के दोबारा सत्यापन में खुली पोल
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसता जा रहा है। देवरिया, आगरा, आजमगढ़, मुजफ्फरनगर और बरेली जैसे जिलों के बाद अब सीतापुर में भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां नियुक्त सात शिक्षकों के उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के प्रमाणपत्र पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित (Forged) पाए गए हैं।
विभाग द्वारा इन शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद जब दोबारा सत्यापन कराया गया, तो उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) कार्यालय ने इस हेरफेर की अंतिम रूप से पुष्टि कर दी है।
पीएनपी ने कभी जारी ही नहीं किए थे 5 अनुक्रमांक
परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच के दौरान दो मुख्य तरह के फर्जीवाड़े सामने आए हैं:
- अस्तित्वहीन रोल नंबर: सीतापुर में शिक्षक बने पांच अभ्यर्थियों ने जिन अनुक्रमांक (रजिस्ट्रेशन/रोल नंबर) के टीईटी प्रमाणपत्र विभाग में जमा किए थे, वे अनुक्रमांक पीएनपी के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं। यानी, पीएनपी ने वे रोल नंबर कभी किसी को आवंटित ही नहीं किए थे।
- दूसरों के रोल नंबर पर डाका: दो अन्य शिक्षकों ने चालाकी दिखाते हुए उन अनुक्रमांकों पर अपने फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवा लिए, जो वास्तव में किसी दूसरे योग्य अभ्यर्थियों को आवंटित किए गए थे।
टेबुलेशन रजिस्टर से मिलान में सामने आया सच
सीतापुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को इन शिक्षकों के खिलाफ शिकायत मिली थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बीएसए ने इन सात शिक्षकों के वर्ष 2013-2014 के टीईटी प्रमाणपत्रों को अंतिम सत्यापन के लिए प्रयागराज स्थित पीएनपी कार्यालय भेजा था।
पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने इन संदिग्ध प्रमाणपत्रों का मिलान विभाग के गणक पंजीका (टेबुलेशन रजिस्टर - TRR) से कराया। इसके बाद पीएनपी रजिस्ट्रार विपेंद्र सिंह की ओर से बीएसए सीतापुर को भेजी गई अंतिम रिपोर्ट में नामजद फर्जीवाड़े का खुलासा किया गया:
- कुमारी कुशललता: इनके सर्टिफिकेट पर दर्ज रोल नंबर वास्तव में अर्चना देवी का था। अर्चना देवी खुद 44 अंक पाकर अनुत्तीर्ण (Fail) थीं, लेकिन कुशललता ने इसी रोल नंबर पर अपना फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवा लिया।
- मनीष सिंह: इनके प्रमाणपत्र पर अंकित रोल नंबर वास्तव में देवेंद्र पाल सिंह को आवंटित किया गया था, जो कि 93 अंक पाकर उत्तीर्ण (Pass) थे। मनीष ने उनके उत्तीर्ण रोल नंबर का गलत इस्तेमाल किया।
- कुमारी पूजा व विवेक कुमार: (पिता का नाम एक होने के आधार पर दोनों भाई-बहन हैं)। इनके टीईटी प्रमाणपत्र पर जो अनुक्रमांक अंकित हैं, वे पीएनपी के अभिलेख में दर्ज ही नहीं हैं।
- मुरारीलाल रावत व जय नारायण सिंह: इनके द्वारा प्रस्तुत किए गए रोल नंबर भी पीएनपी के रिकॉर्ड से गायब हैं, यानी इन्हें कभी आवंटित ही नहीं किया गया था।
अब गोंडा के 5 शिक्षकों पर मंडराया संकट
सीतापुर में इस बड़े खुलासे के बाद अब पड़ोसी जिले गोंडा में भी हड़कंप मच गया है। गोंडा के बीएसए द्वारा भी पांच शिक्षकों के संदिग्ध टीईटी प्रमाणपत्रों को सत्यापन के लिए पीएनपी भेजा गया है, जिनका मिलान वर्तमान में पीएनपी सचिव करा रहे हैं। शुरुआती जांच के आधार पर इन पांचों प्रमाणपत्रों के भी फर्जी होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
विभाग का रुख: पीएनपी और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह का काम हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि कुछ अन्य जनपदों में भी इसी तरह के कूटरचित (फर्जी) प्रमाणपत्रों के सहारे कई अन्य लोग अभी भी शिक्षक के रूप में नौकरी कर रहे हैं। विभाग जल्द ही ऐसे सभी संदिग्धों के खिलाफ बड़े स्तर पर धरपकड़ और कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।


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