प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में अनुशासनहीनता, वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। विभाग द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में विभिन्न गंभीर आरोपों के चलते 15 खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निलंबित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, विभाग के 89 अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया गतिमान है।
प्रमुख कार्रवाई और निलंबन के मुख्य कारण
अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों पर केवल भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि उच्चाधिकारियों से अभद्रता और कार्य में लापरवाही के भी गंभीर आरोप हैं:
- भ्रष्टाचार और अवैध वसूली: मऊ के वीरेन्द्र पांडेय पर कंपोजिट ग्रांट में वसूली और प्रयागराज (उरुवा) के राजेश यादव पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप लगे हैं।
- अनुशासनहीनता और अभद्रता: सहारनपुर के अंबिका प्रसाद ओझा और बलिया के आशुतोष तिवारी को उच्चाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार के कारण निलंबित किया गया। हाथरस के मनीष सिंह पर अशोभनीय टिप्पणी का आरोप है।
- वित्तीय अनियमितता: झांसी के प्रसून जैन और पीलीभीत के कैलाशचंद्र पांडेय पर नियमों के विरुद्ध कार्य करने और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं।
- लापरवाही और अवज्ञा: कासगंज की नीरजा चतुर्वेदी, हापुड़ की रचना सिंह और सीतापुर के कुलदीप समेत कई अधिकारियों को आदेशों की अवहेलना और पोर्टल पर खराब प्रगति (जैसे जालौन के दिव्यव्रत सिंह का यू-डायस डेटा) के लिए दंडित किया गया है।
जांच के दायरे में 89 अन्य अफसर
निलंबन की इस कार्रवाई के अलावा, विभाग के 89 खंड शिक्षा अधिकारियों की फाइलें भी खुली हुई हैं। इन सभी के विरुद्ध अनुशासनात्मक जांच चल रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोष सिद्ध होने पर इन पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
"पिछले दो वर्षों में प्रारंभिक जांच के आधार पर 15 बीईओ को निलंबित किया गया है। सभी मामलों में अलग-अलग जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को जांच सौंपी गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।"— कामता प्रसाद, अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक)
विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। वर्तमान में कानपुर नगर, रामपुर, कन्नौज और शाहजहांपुर जैसे जिलों के अधिकारी भी रडार पर हैं। शासन की मंशा साफ है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा डालने वाले और पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।


