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यूपी कैबिनेट के 22 बड़े फैसले: शिक्षामित्रों का मानदेय लगभग दोगुना, 25 लाख युवाओं को मिलेंगे टैबलेट। देखें अन्य महत्वपूर्ण पारित प्रस्ताव

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ, 07 अप्रैल 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़े 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। यह बैठक उत्तर प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार ने जहाँ एक ओर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि कर उनके जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी ओर 25 लाख युवाओं को टैबलेट देने के निर्णय से डिजिटल सशक्तिकरण की नींव रखी है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, और सामाजिक न्याय से जुड़े कई दूरगामी फैसले लिए गए हैं।

UP Cabinet Meeting April 2026 CM Yogi Decisions

​शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी वृद्धि

​कैबिनेट का सबसे प्रतीक्षित और महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा तंत्र के आधार स्तंभ कहे जाने वाले शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1.43 लाख शिक्षामित्रों और लगभग 24 हजार अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि कर उनकी नौ साल की प्रतीक्षा को समाप्त किया है।

​मानदेय का नया ढांचा:

  • शिक्षामित्र: इनका मानदेय 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
  • अंशकालिक अनुदेशक: इनका मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है।

​यह वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और इसका लाभ मई के भुगतान से मिलना शुरू हो जाएगा। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि शिक्षामित्रों के मानदेय पर आने वाले अतिरिक्त व्यय (लगभग 1257.77 करोड़ रुपये) का भार पूरी तरह से राज्य सरकार वहन करेगी। यह निर्णय प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।

​स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना: डिजिटल क्रांति

​प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। वर्तमान दौर में डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन शिक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए यह एक बड़ा कदम है। इससे न केवल छात्रों को अपनी पढ़ाई में मदद मिलेगी, बल्कि वे रोजगार के डिजिटल अवसरों के लिए भी तैयार हो सकेंगे।

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​सामाजिक न्याय: 'डॉ. बी.आर. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना'

​योगी सरकार ने महापुरुषों के योगदान को सम्मान देने और उनकी विरासत को सहेजने के लिए एक अनूठी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व के स्मारकों का कायाकल्प किया जाएगा।

  • योजना का स्वरूप: हर विधानसभा में 10 स्मारकों का चयन किया जाएगा।
  • वित्तीय प्रावधान: प्रत्येक स्मारक के विकास के लिए 10 लाख रुपये खर्च होंगे, जिससे कुल 403 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • सौंदर्यीकरण: बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों की मूर्तियों के आसपास बाउंड्रीवॉल, प्रकाश व्यवस्था, और हरियाली विकसित की जाएगी।

​इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने नायकों के जीवन और विचारों से जोड़ना है। साथ ही, इन स्थलों को पर्यटन और स्थानीय रोजगार के केंद्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है।

​परिवहन क्षेत्र का कायाकल्प: पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस अड्डे

​उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार ने पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाने का निर्णय लिया है।

  • अत्याधुनिक सुविधाएं: नए बस स्टेशनों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जहाँ यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, होटल, रेस्टोरेंट और स्वच्छ प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
  • निवेश और विस्तार: इस परियोजना में 4000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान है। योजना के दूसरे चरण में 49 बस अड्डों को शामिल किया गया है, जिससे अब कुल 52 जनपद इस सुविधा से आच्छादित हो जाएंगे।
  • शर्तों में रियायत: निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तकनीकी क्षमता की शर्त को कम किया गया है और निर्माण की समय सीमा को 5 से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दिया गया है।

​शिक्षा के नए आयाम: गोरखपुर और ग्रेटर नोएडा में विश्वविद्यालय

​उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:

  1. उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय (गोरखपुर): गोरखपुर के कैम्पियरगंज में 491 करोड़ रुपये की लागत से यह विश्वविद्यालय स्थापित होगा। यह देश का दूसरा और उत्तर भारत का पहला वानिकी विश्वविद्यालय होगा। यहाँ बीएससी, एमएससी और पीएचडी जैसे पाठ्यक्रम संचालित होंगे, जो वनावरण बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण में मदद करेंगे।
  2. मेट्रो विश्वविद्यालय (ग्रेटर नोएडा): निजी क्षेत्र के तहत इस विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई है। यह 26.1 एकड़ भूमि पर विकसित होगा और आधुनिक एवं रोजगारपरक शिक्षा पर केंद्रित होगा।

​विस्थापितों को दशकों बाद मिला अधिकार

​कैबिनेट ने एक बहुत ही संवेदनशील और मानवीय निर्णय लेते हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए 12,380 परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक देने का फैसला किया है।

  • प्रभावित क्षेत्र: पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में दशकों से रह रहे ये परिवार अब तक अपनी जमीन के कानूनी मालिक नहीं थे।
  • लाभ: अब ये परिवार भूमिधर कहलाएंगे, जिससे वे बैंकों से कृषि ऋण प्राप्त कर सकेंगे और अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच पाएंगे।
  • हिंदू बंगाली परिवार: इसी तरह, पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित 63 हिंदू बंगाली परिवारों को कानपुर देहात में 1 रुपये की सांकेतिक लीज पर पुनर्वासित करने का निर्णय लिया गया है।

​बुनियादी ढांचा: कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य

​क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए सरकार ने नए पुलों और मेडिकल कॉलेज की स्थापना को प्रशासनिक मंजूरी दी है:

  • नारायणी नदी पर पुल (कुशीनगर): खड्डा विधानसभा क्षेत्र में 705 करोड़ की लागत से बनने वाले इस पुल से यूपी और बिहार के बीच बारहमासी संपर्क स्थापित होगा और दूरी 40-50 किमी कम हो जाएगी।
  • गंगा नदी पर पुल (छिबरामऊ): कन्नौज और हरदोई को जोड़ने के लिए 289 करोड़ की लागत से गंगा नदी पर पुल बनेगा, जिससे लगभग 4 लाख लोगों को लाभ होगा।
  • स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (बलिया): बलिया में 437 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कॉलेज बनेगा। इसके लिए जिला कारागार की 14.05 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को निशुल्क दी जाएगी। यहाँ एमबीबीएस की 100 सीटों के साथ उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा मिलेगी।

​औद्योगिक निवेश और आर्थिक नीतियां

​मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में 24,000 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। ये निवेश शाहजहांपुर, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, प्रयागराज और मुरादाबाद जैसी औद्योगिक इकाइयों में किए जाएंगे, जिससे हजारों की संख्या में रोजगार सृजित होंगे।

​इसके साथ ही, गेहूं खरीद को सुगम बनाने के लिए खाद्य विभाग को उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) से पुराने खाली जूट के बोरे सीधे खरीदने की अनुमति दी गई है। यह निर्णय वैश्विक युद्धों (इजरायल-ईरान-अमेरिका) के कारण जूट की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को देखते हुए लिया गया है ताकि किसानों से गेहूं की खरीद निर्बाध रूप से जारी रहे।

​निष्कर्ष

​उत्तर प्रदेश कैबिनेट के ये 22 निर्णय राज्य की प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की आर्थिक स्थिति में सुधार से लेकर विस्थापितों को मालिकाना हक देने तक, हर फैसले में सामाजिक संतुलन का ध्यान रखा गया है। जहाँ बुनियादी ढांचा और परिवहन क्षेत्र भविष्य की औद्योगिक प्रगति का आधार बनेंगे, वहीं नए विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रदेश को शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। 25 लाख टैबलेट का वितरण युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, जो उत्तर प्रदेश के विकास की गति को और तेज करेगा।