नई दिल्ली: भारत की आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गृह सचिव गोविंद मोहन द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, जनगणना कार्य में जुटे किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला अब 31 मार्च, 2027 तक नहीं किया जा सकेगा। यह कदम देश की पहली 'डिजिटल जनगणना' को बिना किसी बाधा के समय पर पूरा करने के लिए उठाया गया है।
सरकार का मानना है कि जनगणना एक जटिल और वैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि बीच प्रक्रिया में अधिकारियों का तबादला होता है, तो कार्य की निरंतरता टूट सकती है।
- नियम: जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नियुक्त अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया समाप्त होने तक उनके वर्तमान पद पर ही बने रहना अनिवार्य होगा।
- निर्देश: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस संबंध में जल्द से जल्द आवश्यक आदेश जारी करें।
डिजिटल अवतार में होगी 'जनगणना 2027'
इस बार की जनगणना पूरी तरह आधुनिक और कागज-रहित (Paperless) होगी। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- सेल्फ-एन्यूमरेशन: पहली बार नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करने की सुविधा दी गई है।
- दो चरणों में कार्य: * पहला चरण: हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का कार्य अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की अवधि में पूरा होगा।
- दूसरा चरण: मुख्य जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में की जाएगी।
पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए अलग शेड्यूल
भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में मुख्य गणना का काम फरवरी 2027 के बजाय सितंबर 2026 में ही संपन्न कर लिया जाएगा।
प्रशिक्षण और नियुक्तियाँ शुरू
राज्य, जिला और तहसील स्तर पर जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। 'डिजिटल इंडिया' के विजन को मजबूती देते हुए, इन कर्मियों को डेटा संकलन के आधुनिक उपकरणों और मोबाइल ऐप्स का उपयोग करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।


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