नई दिल्ली: भारत सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने देश के प्रत्येक छात्र को डिजिटल पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, शिक्षा सचिव संजय कुमार (IAS) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 'APAAR Saturation Plan' (अपाार संतृप्ति योजना) को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है APAAR ID और यह क्यों जरूरी है?
APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) एक 'एक राष्ट्र, एक छात्र पहचान' (One Nation, One Student ID) पहल है। यह छात्र की शैक्षणिक यात्रा, उपलब्धियों और क्रेडिट को एक डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रखता है, जिससे ट्रांसफर और उच्च शिक्षा के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में आसानी होती है।
अभियान की मुख्य बातें:
पत्र के अनुसार, इस अभियान को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित रणनीतियां अपनाई गई हैं:
- लक्ष्य और वर्तमान स्थिति: 31 मार्च 2026 तक, देश के कुल 24.65 करोड़ छात्रों में से लगभग 16.05 करोड़ छात्रों की आईडी बन चुकी है। शेष 8.6 करोड़ छात्रों को कवर करने के लिए यह नया डेटा-संचालित प्लान बनाया गया है।
- मेगा अपार दिवस (APAAR Diwas): 11 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 के बीच स्कूलों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
- शनिवार को विशेष कैंप: स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे सप्ताह में कम से कम एक बार, अधिमानतः शनिवार को, उन अभिभावकों को आमंत्रित करें जिनके बच्चों की आईडी अभी तक नहीं बनी है।
- UDISE+ का उपयोग: स्कूल UDISE+ डेटा के माध्यम से उन छात्रों की पहचान करेंगे जिनके पास या तो आधार नहीं है या आधार होने के बावजूद APAAR ID नहीं बनी है।
समय सीमा और निगरानी
सरकार ने 30 जून 2026 तक शत-प्रतिशत (100%) लक्ष्य प्राप्त करने का समय निर्धारित किया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे इसकी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट साझा करें।
"यह पहल छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।" — संजय कुमार, सचिव, शिक्षा मंत्रालय
अभिभावकों के लिए संदेश
जिन छात्रों की APAAR ID अभी तक नहीं बनी है, उनके अभिभावक अपने नजदीकी स्कूल से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए सहमति (Consent) और आधार संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य होगा।



Social Plugin