लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए अवकाश (Leave) के नियम हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं। अक्सर शिक्षक संगठन यह मांग उठाते रहे हैं कि उन्हें भी अन्य राज्य कर्मचारियों की तरह अर्जित अवकाश (EL) की सुविधा मिले। इसी संदर्भ में 10 अगस्त 2024 को शासन द्वारा जारी किया गया वह महत्वपूर्ण आदेश आज भी शिक्षकों के लिए एक बड़ी जानकारी है, जिसमें उनकी इन मांगों को खारिज कर दिया गया था।
उपेंद्र मणि मिश्रा केस: क्या थी पूरी कहानी?
यह मामला याचिका संख्या 511/2024 (उपेंद्र मणि मिश्रा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि परिषदीय शिक्षकों को भी केंद्रीय विद्यालय (KVS) और दिल्ली सरकार के शिक्षकों की तरह विशेष अवकाश (शादी और शोक के लिए) और 31 दिन की EL दी जाए।
शासन का वह फैसला: क्यों नहीं मिली 31 दिन की EL?
प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा द्वारा जारी उस आधिकारिक आदेश (कार्यालय-ज्ञाप) में स्पष्ट किया गया था कि:
- छुट्टियों का दोहरा लाभ नहीं: शासन का तर्क था कि राज्य कर्मचारियों को ग्रीष्मकालीन (Summer) और शीतकालीन (Winter) अवकाश नहीं मिलता, इसलिए उन्हें 31 दिन की EL मिलती है।
- शिक्षकों का पक्ष: चूंकि शिक्षकों को 20 मई से 15 जून और 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक की लंबी छुट्टियां मिलती हैं, इसलिए वे अन्य राज्य कर्मचारियों की सेवा शर्तों के बराबर नहीं माने जा सकते।
- सिर्फ 01 दिन की EL: आदेश में दोहराया गया कि परिषदीय शिक्षकों को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में केवल 01 दिन का ही उपार्जित अवकाश (EL) देय है।
आज भी लागू हैं यही नियम
अगस्त 2024 के उस आदेश के बाद से स्थिति जस की तस बनी हुई है। वर्तमान में शिक्षकों को मिलने वाले मुख्य अवकाश इस प्रकार हैं:
- 14 दिन का आकस्मिक अवकाश (CL)।
- 730 दिन का बाल्य देखभाल अवकाश (CCL - महिला शिक्षकों के लिए)।
- 180 दिन का मातृत्व अवकाश।
- 01 वर्ष का पूर्ण वेतन पर चिकित्सकीय अवकाश।
निष्कर्ष
यह पुराना आदेश इस बात का प्रमाण है कि शासन शिक्षकों और अन्य राज्य कर्मचारियों की सेवा शर्तों को अलग-अलग मानता है। हालांकि शिक्षक संगठन आज भी बेहतर अवकाश सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में 2024 का यह आदेश ही आधार बना हुआ है।




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