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मनमाने समायोजन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षक, एक गलती सुधारने में और बड़ी भूल कर बैठे अफसर

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज/लखनऊ। परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में किए जा रहे मनमाने शिक्षक समायोजन के खिलाफ शिक्षकों का आक्रोश अब अदालत तक पहुंच गया है। विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रयागराज और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दाखिल कर तीसरे चरण के समायोजन को नियमविरुद्ध बताया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि समायोजन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, वरिष्ठता का उल्लंघन और मनमानी की गई।

शिक्षामित्रों को शिक्षक मानकर समायोजन पर आपत्ति

शिक्षकों की ओर से दायर याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि कुछ जिलों में शिक्षामित्रों को भी शिक्षक मानते हुए समायोजन कर दिया गया, जबकि यह पूरी तरह नियमों के विपरीत है। इससे नियमित शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं और विद्यालयों में अव्यवस्था की स्थिति बन गई है।

मनमाने शिक्षक समायोजन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षक

तीन चरणों में भी नहीं सुलझी विसंगतियां

पिछले वर्ष जून में पहले चरण के समायोजन के दौरान कई जिलों में बड़ी संख्या में विद्यालय एकल शिक्षक वाले हो गए थे। इसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन किया गया, लेकिन तब भी विसंगतियां दूर नहीं हो सकीं।
दिसंबर के अंत में किए गए तीसरे चरण के समायोजन में भी शिक्षकों से विकल्प नहीं लिया गया और कई जिलों में कहीं वरिष्ठ तो कहीं कनिष्ठ शिक्षकों को जबरन दूसरे विद्यालयों में भेज दिया गया।

टीईटी को लेकर फिर खड़ा हुआ विवाद

कुछ जिलों में प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक बना दिया गया, जबकि एक स्तर से दूसरे स्तर के विद्यालय में भेजे जाने को लेकर टीईटी की अनिवार्यता पर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। इसे भी याचिकाओं में प्रमुख आधार बनाया गया है।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

लखनऊ बेंच में दाखिल याचिकाओं पर पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था। अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होनी है, जिस पर हजारों शिक्षकों की निगाहें टिकी हैं।

सचिव ने तलब की समायोजन रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशकों से समायोजन की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
14 नवंबर को यू-डायस पोर्टल पर दर्ज छात्र संख्या के आधार पर मानक से अधिक शिक्षक वाले विद्यालयों से शिक्षकों को शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में भेजने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि 26 दिसंबर को हुई समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ने समायोजन की प्रगति पर अप्रसन्नता जताई थी।

एक गलती सुधारने में और बड़ी भूल

शिक्षकों का आरोप है कि पहले चरण में की गई गलती को सुधारने के प्रयास में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने और भी बड़ी भूल कर दी। जून 2025 के समायोजन के बाद जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अफसरों ने आदेश रद्द कर शिक्षकों को मूल विद्यालयों में वापस भेजना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी याचिकाएं दाखिल हो गईं।

मामला बिगड़ता देख नवंबर 2025 के हाईकोर्ट आदेश के अनुपालन में आनन-फानन में तीसरे चरण का समायोजन कर दिया गया। आरोप है कि इस चरण में कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने सभी नियमों को दरकिनार करते हुए मनमाने आदेश जारी किए।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि समायोजन प्रक्रिया को पारदर्शी, नियमसम्मत और विकल्प आधारित नहीं बनाया गया तो आंदोलन और कानूनी लड़ाई तेज की जाएगी। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में सरकार क्या जवाब देती है और शिक्षकों को राहत मिलती है या नहीं।