प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक समायोजन (Intra District Teacher Adjustment) से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षक को अधिशेष (Surplus) घोषित करने से पहले शिक्षक-छात्र अनुपात (PTR) एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) के मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य सरकार को विद्यालयवार विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार को तीन अलग-अलग सूची तैयार करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूरे प्रदेश के विद्यालयों का डेटा तीन अलग-अलग श्रेणियों में प्रकाशित करने का आदेश दिया है—
- पहली सूची: ऐसे विद्यालय जहां कोई भी शिक्षक सरप्लस नहीं है।
- दूसरी सूची: ऐसे विद्यालय जहां शिक्षक अधिशेष पाए गए हैं और उनका समायोजन प्रस्तावित है।
- तीसरी सूची: प्रदेश के 16,986 ऐसे विद्यालय, जहां शिक्षकों की कमी है और समायोजन के माध्यम से नियुक्ति की जाएगी।
इसके साथ ही तीसरी सूची को भी दो भागों में विभाजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन विद्यालयों में न्यूनतम दो शिक्षक उपलब्ध कराए जाने हैं तथा किन विद्यालयों में अन्य रिक्त पदों को भरा जाना है।
प्रत्येक विद्यालय की यह जानकारी होगी सार्वजनिक
न्यायालय ने कहा है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पोर्टल पर प्रत्येक विद्यालय से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रकाशित की जाए। इसमें निम्न विवरण शामिल होंगे—
- जनपद एवं विकासखंड का नाम
- विद्यालय का नाम
- आरटीई के अनुसार स्वीकृत शिक्षक पद
- वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षकों के नाम
- प्रत्येक शिक्षक की कार्यग्रहण (Joining) तिथि
- उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विषयवार विवरण
- 30 अप्रैल 2026 तक विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या
- आरटीई के अनुसार आवश्यक शिक्षकों की संख्या
- यदि कोई शिक्षक अधिशेष घोषित किया गया है तो उसका नाम एवं विषय श्रेणी
शिक्षक कर सकेंगे आपत्ति दर्ज
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले सरकार अधिशेष शिक्षकों की सूची सार्वजनिक करेगी। इसके बाद संबंधित शिक्षक यदि स्वयं को गलत तरीके से सरप्लस घोषित किया गया मानते हैं तो वे अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके अतिरिक्त अन्य सूचियों में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर भी आपत्ति प्रस्तुत की जा सकेगी।
हेड शिक्षकों के समायोजन को लेकर हमारी IA 12/2026 दाखिल है और कोर्ट अभी समस्त objections को सुनने के mood में है तो ऐसे शिक्षक जहाँ की छात्र संख्या अब बढ़ चुकी है वे अपनी बात अवश्य रखें इसके अलावा विषयवार शिक्षक भी अपनी स्थिति के हिसाब से objections अवश्य दें । - #rana
महत्वपूर्ण तिथियां
| कार्य | तिथि |
|---|---|
| सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा शपथपत्र सहित सूची प्रस्तुत करना | 13 जुलाई 2026 |
| आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि | 17 जुलाई 2026 |
| अगली सुनवाई | 20 जुलाई 2026 |
अंतरिम आदेश रहेगा प्रभावी
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले से लागू अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा। अर्थात अंतिम निर्णय आने तक पूर्व व्यवस्था यथावत बनी रहेगी।
हेड टीचर समायोजन पर भी सुनवाई की संभावना
हेड शिक्षकों के समायोजन से संबंधित आवेदन भी न्यायालय के समक्ष लंबित है। ऐसे में जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ चुकी है अथवा विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता में परिवर्तन हुआ है, वे संबंधित शिक्षक समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां एवं आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर सकते हैं।
हाईकोर्ट के इस आदेश का उद्देश्य शिक्षक समायोजन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तथ्य आधारित बनाना है। विद्यालयवार विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक होने से प्रत्येक शिक्षक यह समझ सकेगा कि उसे किस आधार पर अधिशेष घोषित किया गया है तथा आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्ति भी दर्ज करा सकेगा। इससे समायोजन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी होने की उम्मीद है।





