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U-DISE+ 2025-26: यूपी के 313 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं, 7,874 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर यू-डायस प्लस (U-DISE Plus) 2025-26 की नई रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में एक ओर ऐसे 313 सरकारी विद्यालय हैं, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है, जबकि इन विद्यालयों में 177 शिक्षक तैनात हैं। वहीं दूसरी ओर 7,874 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पूरे स्कूल की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है। इन विद्यालयों में कुल 4,85,071 छात्र अध्ययनरत हैं।

U-DISE Plus Report 2025-26: यूपी के 313 स्कूलों में छात्र नहीं, 7,874 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे

यह रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती केवल स्कूलों या शिक्षकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का सही और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना भी है।

प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा तस्वीर

शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी यू-डायस प्लस 2025-26 के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 2,65,278 स्कूल, 4,27,03,359 छात्र और 16,42,764 शिक्षक हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश का छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) 26:1 है, अर्थात औसतन एक शिक्षक पर 26 छात्र हैं। इसी प्रकार प्रत्येक विद्यालय में औसतन 6 शिक्षक और 161 छात्र हैं। हालांकि औसत आंकड़े संतुलित दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति कई जिलों में बिल्कुल अलग है।

313 स्कूलों में नहीं है एक भी छात्र

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 313 सरकारी विद्यालयों में एक भी छात्र नामांकित नहीं है, जबकि वहां 177 शिक्षक कार्यरत हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कई स्थानों पर विद्यालयों का उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहा है और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन आवश्यक है।

7,874 विद्यालयों में सिर्फ एक शिक्षक

दूसरी ओर प्रदेश के 7,874 विद्यालय ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक पूरे स्कूल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इन विद्यालयों में 4.85 लाख से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं। ऐसे विद्यालयों में एक ही शिक्षक को अलग-अलग कक्षाओं का संचालन, प्रशासनिक कार्य और अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

उत्तर प्रदेश 12 राज्यों की सूची में शामिल

यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश उन 12 राज्यों में शामिल है, जहां छात्रों की संख्या की तुलना में विद्यालय अपेक्षाकृत अधिक हैं। इसका अर्थ है कि कई विद्यालयों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है।

इस सूची में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मेघालय शामिल हैं। वहीं महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और केरल जैसे राज्यों में छात्रों की तुलना में विद्यालय कम हैं, जिससे प्रति विद्यालय छात्रों का दबाव अधिक है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यू-डायस प्लस 2025-26 की रिपोर्ट शिक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है। जिन विद्यालयों में छात्र नहीं हैं, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वहीं जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं, वहां जल्द अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति या तैनाती की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार केवल नए विद्यालय खोलना या शिक्षकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों और विद्यालयों का संतुलित एवं आवश्यकता आधारित वितरण सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।

यू-डायस प्लस 2025-26 की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने लाती है। एक ओर खाली विद्यालय हैं तो दूसरी ओर हजारों स्कूल एकमात्र शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, शिक्षकों का संतुलित स्थानांतरण तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाते हैं तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार संभव है।