नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते ट्रैफिक और लंबे जाम की समस्या को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक नई टोल व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, व्यस्त समय (पीक ऑवर्स) में वाहन चालकों से 20% अधिक टोल शुल्क लिया जाएगा, जबकि कम भीड़ वाले समय (नॉन-पीक ऑवर्स) में टोल शुल्क में 20% तक की छूट दी जा सकती है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस व्यवस्था को डायनेमिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग समय में संतुलित करना और हाईवे पर ट्रैफिक जाम को कम करना है।
प्रस्ताव के अनुसार, सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे तक तथा शाम 5:00 बजे से 8:00 बजे तक का समय पीक ऑवर्स माना जाएगा। इन घंटों में टोल शुल्क सामान्य दर से 20 प्रतिशत अधिक होगा। वहीं, अन्य समय में यात्रा करने वाले वाहन चालकों को 20 प्रतिशत तक कम टोल देना पड़ सकता है।
मंत्रालय का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से लगभग 15 प्रतिशत भारी वाहन अपनी यात्रा का समय बदलकर नॉन-पीक ऑवर्स में करेंगे। इससे हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और आम यात्रियों को जाम से राहत मिलेगी। साथ ही, ईंधन की बचत होने से हर वर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपये की आर्थिक बचत होने का भी दावा किया गया है।
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सरकार इस नई टोल प्रणाली का परीक्षण पहले चरण में बेंगलुरु–मैसूर एक्सप्रेसवे, पानीपत–हिसार मार्ग और दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर पायलट परियोजना के रूप में शुरू करने की योजना बना रही है। यदि परिणाम सकारात्मक रहे, तो इसे चरणबद्ध तरीके से देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को अपनी यात्रा की योजना समय के अनुसार बनानी होगी, ताकि वे कम टोल शुल्क का लाभ उठा सकें और ट्रैफिक जाम से भी बच सकें।


