लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार स्कूली शिक्षा को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में कक्षा 6 से ही विद्यार्थियों के लिए चरणबद्ध कैरियर काउंसिलिंग व्यवस्था शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि छात्र अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य की बेहतर योजना बना सकें।
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने भारत सरकार की इंटीग्रेटेड स्कीम इन स्किलिंग आर्किटेक्चर (ISSA) के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि इस योजना को विभागों के बेहतर समन्वय, उद्योगों की सक्रिय भागीदारी और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के साथ लागू किया जाए।
बैठक में कक्षा 6 से कैरियर काउंसिलिंग के अलावा विद्यालय प्रबंधन समितियों में उद्योग विशेषज्ञों की भागीदारी, स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत बनाने, आईटीआई और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय, राज्य इंटर्नशिप योजना, अंतरराष्ट्रीय भाषा प्रशिक्षण, कौशल मंदिरों की स्थापना, रोजगार संगम पोर्टल के उन्नयन तथा APAR ID आधारित डिजिटल स्किल प्रोफाइल जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन पहलों से प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण, कैरियर मार्गदर्शन, अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करने, चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और निर्धारित समयसीमा में विस्तृत प्रस्ताव अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही राज्य, जनपद और क्लस्टर स्तर पर चार स्तरीय मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने तथा योजनाओं की रियल-टाइम समीक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुपालन में प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम ने सभी विभागों और संबंधित संस्थाओं से एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने प्रस्ताव प्रशिक्षण निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य छात्रों को शुरुआती स्तर से ही सही कैरियर मार्गदर्शन देकर उन्हें भविष्य के रोजगार और कौशल आधारित अवसरों के लिए तैयार करना है।


