लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को चयन वेतनमान दिए जाने के मुद्दे पर एक बार फिर शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की आश्वासन समिति द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग से इस संबंध में एक माह के भीतर विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई विधान परिषद में दिए गए आश्वासन के अनुपालन के क्रम में की जा रही है।
संयुक्त सचिव, उत्तर प्रदेश विधान परिषद सचिवालय द्वारा अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विधान परिषद की 13 फरवरी 2026 की बैठक में दिए गए आश्वासन के संबंध में अपेक्षित कार्रवाई से समिति को अवगत कराया जाए। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित प्रकरण पर एक माह के भीतर विभाग अपनी आख्या प्रस्तुत करे, ताकि आश्वासन के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट हो सके।
यह मामला विधान परिषद के प्रथम सत्र 2026 के दौरान सदस्य श्री आशुतोष सिन्हा द्वारा उठाए गए तारांकित प्रश्न से जुड़ा है। प्रश्न में पूछा गया था कि क्या परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं को चयन वेतनमान दिया जा रहा है। इसके उत्तर में सरकार ने बताया कि शासनादेश 20 दिसंबर 2001 के अनुसार प्राथमिक शिक्षकों को सामान्य वेतनमान में 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण करने पर चयन वेतनमान का लाभ दिया जाता है। इसके अतिरिक्त चयन वेतनमान में 12 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण करने के बाद प्रोन्नत वेतनमान का लाभ निर्धारित सीमा तक प्रदान किए जाने का भी प्रावधान है।
इसके बाद सदस्य द्वारा वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर जनपदों में पिछले पांच वर्षों के दौरान चयन वेतनमान स्वीकृत किए जाने की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई। सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि इन चारों जनपदों में पिछले पांच वर्षों के दौरान किसी भी शिक्षक को चयन वेतनमान स्वीकृत नहीं किया गया है।
जब यह पूछा गया कि जिन जनपदों में चयन वेतनमान अब तक नहीं दिया गया है, उसके क्या कारण हैं और कब तक लाभ मिलेगा, तब सरकार ने उत्तर दिया कि संबंधित जनपदों से प्राप्त प्रकरणों का विधिवत परीक्षण किया जाएगा तथा परीक्षण के उपरांत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब विधान परिषद की आश्वासन समिति ने इसी आश्वासन के अनुपालन की समीक्षा शुरू कर दी है। समिति ने बेसिक शिक्षा विभाग से अपेक्षित कार्रवाई का पूरा विवरण एक माह के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है। इससे चयन वेतनमान की लंबे समय से लंबित मांग पर एक बार फिर शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
परिषदीय शिक्षकों के बीच यह विषय लंबे समय से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब सभी की निगाहें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली आख्या और उसके आधार पर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि विभाग सकारात्मक निर्णय लेता है, तो चयन वेतनमान से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।



