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बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित हुआ निपुण भारत मिशन, शासन ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक बच्चे को बुनियादी सीखने की दक्षताओं से सशक्त बनाने के उद्देश्य से निपुण भारत मिशन को अब बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में 17 जुलाई 2026 को विस्तृत शासनादेश जारी किया गया है, जिसमें मिशन के उद्देश्यों, सीखने के लक्ष्यों, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन प्रणाली, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों के उपयोग तथा मिशन की निगरानी संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यह नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-FS) के अनुरूप तैयार की गई है, ताकि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत हो और वे आगे की कक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

निपुण भारत मिशन 2026 नई गाइडलाइन, बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित मिशन

अब कक्षा 5 तक चलेगा निपुण भारत मिशन

अब तक निपुण भारत मिशन का मुख्य उद्देश्य बालवाटिका से कक्षा 2 तक के बच्चों में बुनियादी साक्षरता (Foundational Literacy) और संख्यात्मक ज्ञान (Numeracy) विकसित करना था। लेकिन शासन द्वारा किए गए इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद मिशन का दायरा बढ़ाकर कक्षा 5 तक कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि केवल प्रारंभिक कक्षाओं तक सीमित प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। यदि कक्षा 3, 4 और 5 के विद्यार्थियों को भी व्यवस्थित रूप से सीखने के अवसर, निरंतर अभ्यास और नियमित शैक्षणिक सहयोग मिलता रहे, तो वे न केवल भाषा और गणित में दक्ष होंगे बल्कि विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन और अंग्रेजी जैसे विषयों को भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इसी सोच के साथ अब मिशन को अगले स्तर तक विस्तारित किया गया है।

प्रत्येक कक्षा के लिए तय किए गए सीखने के स्पष्ट लक्ष्य

शासनादेश में पहली बार बालवाटिका से लेकर कक्षा 5 तक प्रत्येक कक्षा के लिए विषयवार सीखने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। हिंदी में बच्चों की पढ़ने, समझने और लिखने की क्षमता को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। गणित में संख्या ज्ञान, जोड़-घटाव, गुणा-भाग, तार्किक सोच तथा दैनिक जीवन में गणित के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अंग्रेजी विषय में सुनना, बोलना, पढ़ना और सरल वाक्य लिखना सिखाया जाएगा, जबकि पर्यावरण अध्ययन के माध्यम से बच्चों को अपने परिवेश, प्रकृति, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा सामाजिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इन लक्ष्यों के आधार पर ही शिक्षण कार्य, मूल्यांकन और विद्यार्थियों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

खेल-खेल में सीखने पर रहेगा विशेष जोर

नई कार्ययोजना में स्पष्ट किया गया है कि बच्चों पर अनावश्यक बोझ डालने के बजाय उन्हें गतिविधियों, खेल, कहानी, चित्र, गीत, संवाद और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से सीखने के अवसर दिए जाएं। बालवाटिका में पूरी तरह खेल आधारित शिक्षण वातावरण विकसित किया जाएगा, जबकि कक्षा 1 से 5 तक टीएलएम (Teaching Learning Material), कार्यपत्रक, पुस्तकालय, समूह गतिविधियों, प्रोजेक्ट कार्य तथा डिजिटल सामग्री का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक और प्रभावी बनाया जाएगा। इससे बच्चे केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि अनुभव के माध्यम से सीख सकेंगे।

स्कूल रेडीनेस और कैच-अप शिक्षण से दूर होगी सीखने की कमी

शासन ने यह भी स्वीकार किया है कि सभी बच्चों की सीखने की गति समान नहीं होती। इसी कारण कक्षा 1 में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए स्कूल रेडीनेस मॉड्यूल लागू किया जाएगा, जिससे वे विद्यालय के वातावरण के अनुरूप स्वयं को सहज रूप से ढाल सकें। वहीं जिन विद्यार्थियों में सीखने का अंतर (Learning Gap) पाया जाएगा, उनके लिए विद्यालय स्तर पर कैच-अप शिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें अतिरिक्त अभ्यास, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और आवश्यकता आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों को निर्धारित सीखने के स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

शिक्षकों की भूमिका होगी सबसे महत्वपूर्ण

निपुण भारत मिशन की सफलता में शिक्षकों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, गतिविधि आधारित शिक्षण, दक्षता आधारित मूल्यांकन तथा डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग का नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। समय-समय पर ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि शिक्षक बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को विकसित कर सकें और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा सकें।

डिजिटल तकनीक और दीक्षा पोर्टल का होगा अधिक उपयोग

नई व्यवस्था में डिजिटल शिक्षा को भी विशेष महत्व दिया गया है। विद्यालयों में दीक्षा पोर्टल, ई-पाठशाला, क्यूआर कोड आधारित सामग्री, डिजिटल टीएलएम और अन्य ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन संसाधनों का नियमित उपयोग कर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाएं। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी।

नियमित मूल्यांकन और निपुण विद्यालय आकलन पर रहेगा फोकस

शासनादेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अब विद्यार्थियों की प्रगति केवल वार्षिक परीक्षा के आधार पर नहीं आंकी जाएगी। विद्यालय स्तर पर नियमित कक्षा आधारित मूल्यांकन, फॉर्मेटिव असेसमेंट, दीक्षा प्लेटफॉर्म और निपुण प्लस के माध्यम से बच्चों की सीखने की प्रगति का लगातार आकलन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष निपुण विद्यालय आकलन आयोजित किया जाएगा, जिसके आधार पर विद्यालयों के प्रदर्शन और मिशन की प्रगति का मूल्यांकन होगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य बच्चों की कमजोरियों की समय रहते पहचान कर उनमें सुधार करना है।

अभिभावकों और समुदाय की सहभागिता भी होगी आवश्यक

सरकार का मानना है कि केवल विद्यालय के प्रयासों से ही बच्चों का समग्र विकास संभव नहीं है। इसलिए अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी को भी मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर अभिभावकों से संवाद करें, बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी साझा करें तथा घर पर पढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए उन्हें प्रेरित करें। इससे विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा बच्चों की सीखने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी।

राज्य से लेकर विद्यालय स्तर तक होगी नियमित निगरानी

मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जनपद, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। विभिन्न समितियां समय-समय पर मिशन की प्रगति की समीक्षा करेंगी, विद्यालयों का निरीक्षण करेंगी और आवश्यक सुधारात्मक सुझाव देंगी। साथ ही सीखने के परिणाम, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों के उपयोग तथा विद्यार्थियों की उपलब्धियों की भी नियमित समीक्षा की जाएगी। इससे मिशन को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा।

प्राथमिक शिक्षा में बदलाव की नई शुरुआत

निपुण भारत मिशन का यह विस्तारित स्वरूप उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। बालवाटिका से कक्षा 5 तक स्पष्ट सीखने के लक्ष्य, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, नियमित मूल्यांकन, शिक्षक प्रशिक्षण, कैच-अप कार्यक्रम और अभिभावकों की सहभागिता जैसे कदम शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि शासन के इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है और निपुण भारत मिशन अपने उद्देश्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकेगा।

मुख्य बातें (Highlights)

  • निपुण भारत मिशन का दायरा अब बालवाटिका से कक्षा 5 तक बढ़ाया गया।
  • 17 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने विस्तृत शासनादेश जारी किया।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और NCF-FS के अनुरूप नई कार्ययोजना लागू होगी।
  • हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन के लिए कक्षा-वार सीखने के लक्ष्य निर्धारित किए गए।
  • गतिविधि आधारित, खेल-आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • स्कूल रेडीनेस मॉड्यूल और कैच-अप शिक्षण के माध्यम से Learning Gap कम किया जाएगा।
  • दीक्षा पोर्टल, ई-पाठशाला और अन्य डिजिटल संसाधनों का अधिक उपयोग किया जाएगा।
  • शिक्षकों को नियमित ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • विद्यार्थियों का सतत मूल्यांकन, फॉर्मेटिव असेसमेंट और निपुण विद्यालय आकलन कराया जाएगा।
  • अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा।
  • राज्य, जनपद, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर मिशन की नियमित मॉनिटरिंग होगी।
  • मिशन का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को कक्षा 5 तक आयु एवं कक्षा के अनुरूप दक्ष बनाना है।

⬇️ शासनादेश की PDF डाउनलोड करें


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