उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले के मूरतगंज ब्लॉक के काजू गांव स्थित परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में छात्र का स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) लेने पहुंचे एक अभिभावक और विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने गंभीर रूप ले लिया और कथित तौर पर मारपीट तक की नौबत आ गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल मच गई। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर एक अभिभावक अपने बच्चे का टीसी लेने विद्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने उन्हें बताया कि छुट्टी होने में केवल कुछ ही मिनट शेष हैं और स्थानांतरण प्रमाण पत्र तैयार करने में समय लगेगा। उन्होंने अभिभावक से अगले दिन आने के लिए कहा, ताकि टीसी तैयार करके दिया जा सके।
बताया जा रहा है कि अभिभावक ने यह कहते हुए उसी दिन टीसी देने की मांग की कि वह काफी दूर से विद्यालय पहुंचे हैं और दोबारा आना उनके लिए कठिन होगा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया और विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
अभिभावक का आरोप है कि जब उन्होंने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल फोन से बनाना शुरू किया, तो प्रधानाध्यापिका ने उनका मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद कथित तौर पर शिक्षिका ने चप्पल से उनकी पिटाई भी की। वहीं एक अन्य शिक्षक द्वारा अभिभावक को पकड़ने का भी आरोप लगाया गया। हालांकि अभिभावक किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहे।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने भी मामले की जानकारी ली। हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी हिना सिद्दीकी ने बताया कि घटना के बाद दोनों पक्षों को चरवा थाना बुलाया गया था। उनके अनुसार, अभिभावक सात से आठ लोगों के साथ विद्यालय पहुंचे थे। बातचीत के दौरान शिक्षिका ने अभिभावक के क्षतिग्रस्त मोबाइल की भरपाई कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया और अब किसी भी पक्ष की ओर से कोई विवाद शेष नहीं है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालयों में इस प्रकार की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए संवाद और संयम बनाए रखना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच विद्यालय का सकारात्मक वातावरण बना रहे।
निष्कर्ष
कौशांबी के इस मामले ने एक बार फिर विद्यालयों में अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता को उजागर किया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और मामला शांत हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो या जानकारी पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक तथ्यों की पुष्टि करना हमेशा जरूरी होता है।


