8th Pay Commission News: केंद्र सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की प्रक्रिया तेज होने के बाद देशभर के लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगियों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आयोग के गठन के बाद उसे लगभग 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी। इन सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, महंगाई भत्ते (DA), अन्य भत्तों और पेंशन में संशोधन किया जाएगा। ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि अब तक किस वेतन आयोग ने कर्मचारियों को सबसे अधिक लाभ दिया और 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं।
आजादी के बाद कैसे बदला केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन?
स्वतंत्र भारत में अब तक कुल सात केंद्रीय वेतन आयोग गठित किए जा चुके हैं। प्रत्येक आयोग ने अपने समय की आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए वेतन ढांचे में बदलाव की सिफारिश की। पहले वेतन आयोग (1947) ने न्यूनतम मूल वेतन ₹55 प्रति माह निर्धारित किया था। दूसरे वेतन आयोग (1959) में इसे बढ़ाकर ₹80 किया गया, जबकि तीसरे वेतन आयोग (1973) ने न्यूनतम वेतन ₹196 कर दिया।
इसके बाद चौथे वेतन आयोग ने कर्मचारियों को सबसे बड़ी प्रतिशत वेतन वृद्धि दी और न्यूनतम वेतन ₹196 से बढ़ाकर ₹750 कर दिया। पांचवें वेतन आयोग में यह बढ़कर ₹2,550 हो गया। छठे वेतन आयोग (2006) ने पहली बार 1.86 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया और न्यूनतम वेतन ₹7,000 निर्धारित किया। वहीं सातवें वेतन आयोग (2016) ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू करते हुए न्यूनतम वेतन ₹18,000 कर दिया तथा पे मैट्रिक्स प्रणाली लागू की।
किस वेतन आयोग में कर्मचारियों को सबसे ज्यादा लाभ मिला?
यदि केवल प्रतिशत वृद्धि के आधार पर तुलना की जाए तो चौथा वेतन आयोग कर्मचारियों के लिए सबसे अधिक लाभकारी साबित हुआ। इस आयोग में न्यूनतम वेतन में लगभग 282 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
वहीं यदि फिटमेंट फैक्टर के आधार पर देखा जाए तो सातवां वेतन आयोग सबसे आगे माना जाता है। 2.57 के फिटमेंट फैक्टर ने कर्मचारियों के मूल वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की और पूरे वेतन ढांचे को आधुनिक स्वरूप दिया।
8वें वेतन आयोग से क्या हैं उम्मीदें?
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम मूल वेतन में बढ़ोतरी, फिटमेंट फैक्टर में संशोधन, महंगाई भत्ते (DA) की नई व्यवस्था, अन्य भत्तों में बदलाव और पेंशन व्यवस्था को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इसके साथ ही वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए वेतन संरचना में भी व्यापक बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि सरकार ने अभी तक आयोग की अंतिम सिफारिशों या संभावित वेतन वृद्धि को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। इसलिए सभी बदलाव आयोग की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लागू होंगे।
अब तक के सातों केंद्रीय वेतन आयोगों ने समय-समय पर कर्मचारियों के वेतन और पेंशन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। प्रतिशत वृद्धि के लिहाज से चौथा वेतन आयोग सबसे अधिक लाभ देने वाला साबित हुआ, जबकि फिटमेंट फैक्टर के मामले में सातवां वेतन आयोग सबसे आगे रहा। अब सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग पर हैं, जिससे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बेहतर वेतन, बढ़े हुए भत्तों और अधिक पेंशन की उम्मीद है।


