लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग कर रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने शनिवार को बसपा प्रमुख मायावती के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में न्याय की मांग उठाई और अपने पक्ष में हस्तक्षेप करने की अपील की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अभ्यर्थियों को हटाया और उन्हें बसों में बैठाकर पुलिस लाइन भेज दिया। इस दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही।
अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने बताया कि 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्तुत किए गए शपथपत्र (एफिडेविट) में दिए गए आंकड़ों से अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि विभाग द्वारा प्रस्तुत जानकारी में विरोधाभास है और इससे लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे अभ्यर्थियों की उम्मीदों को झटका लगा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले पांच वर्षों से लगातार नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती से मांग की कि वे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के समर्थन में आगे आएं और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पहल करें।
अभ्यर्थियों ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के शीघ्र समाधान के बाद योग्य अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति देने की मांग भी दोहराई।
मुख्य बातें
- 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मायावती आवास के बाहर किया प्रदर्शन।
- आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग उठाई।
- पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेजा।
- सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट के आंकड़ों पर अभ्यर्थियों ने जताई नाराजगी।
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शीघ्र न्याय की मांग दोहराई।


