लखनऊ। बदलती जीवनशैली, महानगरीय संस्कृति और आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज हमारे समाज का सबसे मजबूत स्तंभ—यानी हमारे बुजुर्ग—अकेलेपन और उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। इसी गंभीर चिंता को रेखांकित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस' (World Elder Abuse Awareness Day) पर प्रदेशवासियों के नाम एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक पत्र जारी किया है। मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि वृद्धजन किसी भी समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं, और उनके सम्मान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की है।
आधुनिक जीवनशैली और अकेलेपन का दंश
अपने संदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज रोजगार, शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली की मजबूरी के कारण युवा पीढ़ी अपने घरों से दूर जा रही है। इसका सीधा असर घर पर पीछे छूटे बुजुर्ग माता-पिता पर पड़ रहा है। वे न सिर्फ अकेलेपन से जूझ रहे हैं, बल्कि कई मामलों में उपेक्षा और मानसिक-शारीरिक दुर्व्यवहार का शिकार भी हो रहे हैं।
कीपैड और स्क्रीन की इस दुनिया में बुजुर्गों को सबसे ज्यादा अपनेपन, सम्मान और सहारे की जरूरत होती है। मुख्यमंत्री ने समाज को झकझोरते हुए कहा कि वृद्धावस्था जीवन का वह पड़ाव है जहां उन्हें अकेला छोड़ देना या उनके साथ दुर्व्यवहार करना एक सभ्य समाज के माथे पर कलंक की तरह है।
सनातन परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों का स्मरण
मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का हवाला देते हुए समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने का आह्वान किया। उन्होंने हमारे इतिहास और पुराणों से दो महान उदाहरण सामने रखे:
- भगवान गणेश का आदर्श: जिन्होंने अपने माता-पिता (भगवान शिव और माता पार्वती) की परिक्रमा को ही संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा मानकर मातृ-पितृ भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया।
- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम: जिन्होंने अपने पिता के वचनों को निभाने के लिए राजपाठ त्याग दिया और सहर्ष वनवास चले गए।
मुख्यमंत्री ने कहा:"हमारे वेदों और शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है—'मातृदेवो भवः, पितृदेवो भवः'। माता-पिता और गुरु को ईश्वर का रूप मानने वाली इस पावन धरती पर यदि बुजुर्गों को आंसू बहाने पड़ें, तो यह हमारी गौरवशाली सभ्यता के पतन का संकेत है। बुजुर्गों का सम्मान करना केवल एक संस्कार नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की पहचान है।"
उत्तर प्रदेश सरकार का सुरक्षा कवच: वृद्धजन और निराश्रित कल्याण
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोक-कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत उत्तर प्रदेश सरकार बुजुर्गों और समाज के वंचित तबके को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का विवरण देते हुए उन्होंने मुख्य कदम गिनाए:
- निराश्रित महिला पेंशन योजना: पात्र महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह की सीधी आर्थिक सहायता दी जा रही है ताकि वे आत्मनिर्भर रह सकें।
- स्वास्थ्य सुरक्षा कवच: बुजुर्गों को बीमारी के समय संबल देने के लिए आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
- आवास और बुनियादी जरूरतें: निराश्रित और वृद्धजनों को पक्के आवास तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि बुजुर्गों की समस्याओं और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और 'स्वस्थ वृद्धावस्था' का संकल्प
अपने पत्र के समापन में मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष योग दिवस की वैश्विक थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" रखी गई है। यह थीम इस बात का प्रमाण है कि पूरी दुनिया आज बुजुर्गों के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन को लेकर गंभीर है।
उन्होंने प्रदेश के सभी वरिष्ठ नागरिकों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया, ताकि वे दीर्घायु और निरोगी जीवन जी सकें। साथ ही, उन्होंने समाज से अपील की कि वे अपने घरों के बुजुर्गों के अनुभवों, ज्ञान और मार्गदर्शन का लाभ उठाएं, क्योंकि एक तजुर्बेकार बुजुर्ग का साया पूरे परिवार को बिखरने से बचाता है।



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