लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षामित्रों के भविष्य को लेकर एक अहम मांग सामने आई है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने शासन से अपील की है कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के लिए आयोजित होने वाली 'विशेष टीईटी' (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में शिक्षामित्रों को भी शामिल होने का अवसर दिया जाए।
विशेष टीईटी का आयोजन और अनिवार्यता
हाल ही में यह तय किया गया है कि परिषदीय स्कूलों में कार्यरत लगभग 1.86 लाख शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य है। इन शिक्षकों की सुविधा और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार जल्द ही एक 'विशेष टीईटी' आयोजित करने जा रही है, ताकि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी यह अनिवार्य योग्यता पूरी कर सकें। इसी क्रम में बीटीसी शिक्षक संघ ने तर्क दिया है कि जब शिक्षकों के लिए यह विशेष परीक्षा आयोजित की जा रही है, तो इसका दायरा बढ़ाकर शिक्षामित्रों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।
आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में लगभग 1.48 लाख शिक्षामित्र अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 50 हजार से अधिक शिक्षामित्र ऐसे हैं जो अपनी मेहनत से पहले ही टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। अब मुख्य मांग उन बचे हुए शिक्षामित्रों के लिए है, जिन्होंने अब तक यह परीक्षा पास नहीं की है। संघ का कहना है कि शेष शिक्षामित्रों को भी इस विशेष परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलनी चाहिए, ताकि वे भी अपनी पात्रता सिद्ध कर सकें।
महामंत्री संदीप दत्त ने की पैरवी
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री संदीप दत्त ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए शासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षामित्र लंबे समय से बेसिक शिक्षा विभाग में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए विशेष टीईटी के रूप में मिलने वाले इस अवसर से उन्हें वंचित नहीं किया जाना चाहिए।


