शिक्षक की संदिग्ध मौत पर अदालत सख्त, हंडिया पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने एक शिक्षक की संदिग्ध मौत के मामले में तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। पुलिस द्वारा मृतक के परिजनों की शिकायत पर ध्यान न दिए जाने के बाद यह मामला अदालत पहुंचा था। सीजेएम कोर्ट ने पोस्टमार्टम और पंचायतनामा की रिपोर्ट देखने के बाद माना है कि मौत की परिस्थितियां संदिग्ध हैं, जिसकी गहन जांच होना अत्यंत आवश्यक है।
यह पूरा मामला हंडिया थाना क्षेत्र का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक श्रीचंद्र कुशवाहा हंडिया के इमामगंज स्थित जनता इंटर कॉलेज में बतौर शिक्षक कार्यरत थे। परिजनों की याचिका में बताया गया है कि वर्ष 2018 में उनके बेटे का विवाह हुआ था, जिसके बाद से ही परिवार में गहरे विवाद शुरू हो गए थे। आरोप है कि शिक्षक अपनी बहू और उसके भाई के व्यवहार के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव और परेशानी में रहते थे। इसी पारिवारिक कलह और रोज-रोज के विवादों से तंग आकर श्रीचंद्र कुशवाहा अपना घर छोड़कर प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र में एक किराये के मकान में एकांत जीवन व्यतीत कर रहे थे।
इसी बीच, बीते 7 मई 2023 को किराये के मकान में ही संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। मामले में सबसे अधिक संदेह तब पैदा हुआ जब परिजनों को उनकी मौत की सूचना समय रहते नहीं दी गई। मृतक की वृद्ध मां ने इस घटना को स्वाभाविक मौत मानने से इनकार करते हुए अपने बेटे की हत्या किए जाने का गंभीर आरोप लगाया।
जब पीड़ित मां की गुहार पर स्थानीय पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की और मुकदमा दर्ज करने से कन्नी काट ली, तो मजबूर होकर उन्हें न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। सीजेएम प्रयागराज ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट, मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पंचायतनामा का बारीकी से अवलोकन किया। सभी तथ्यों और दस्तावेजों को देखने के बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। अदालत ने हंडिया पुलिस को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि वह अविलंब इस मामले में एफआईआर दर्ज करे और निष्पक्ष रूप से जांच कर सच्चाई को सामने लाए।


