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स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने के लिए मुख्य सचिव का सख्त निर्देश, लापरवाही पर नपेंगे अफसर

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर करने के लिए सरकार ने अब सीधे तौर पर प्रशासनिक अफसरों की जवाबदेही तय कर दी है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने साफ कर दिया है कि कागजी दावों के दिन अब लद चुके हैं, अब जमीन पर काम दिखाना होगा। मंगलवार को हुई एक उच्चस्तरीय वीडियो कांफ्रेंसिंग में उन्होंने दो टूक कहा कि अगर स्कूलों की व्यवस्था में कोई भी गड़बड़ी मिली, तो गाज सीधे जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरेगी।

यूपी में माध्यमिक स्कूलों के निरीक्षण का निर्देश देते शिक्षा अधिकारी।

​1. 'टेबल वर्क' छोड़ मैदान में उतरेंगे अफसर, नियमित होगा निरीक्षण

​अपर मुख्य सचिव ने सभी मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों (JDs) और जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के माध्यमिक स्कूलों का नियमित और औचक निरीक्षण करें। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य सिर्फ हाजिरी जांचना नहीं, बल्कि:

  • ​स्कूलों में नियमित और समय सारणी के अनुसार कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करना।
  • ​शिक्षकों की उपस्थिति और उनके पढ़ाने के तौर-तरीकों (शैक्षिक गुणवत्ता) की जांच करना।
  • ​पढ़ाई के स्तर की लगातार समीक्षा करना ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

​2. 'प्रोजेक्ट अलंकार': हाईटेक और आधुनिक बनेंगे राजकीय स्कूल

​उत्तर प्रदेश सरकार राजकीय माध्यमिक स्कूलों का कायाकल्प करने के लिए 'प्रोजेक्ट अलंकार' पर तेजी से काम कर रही है। इस योजना का मकसद सरकारी स्कूलों को कॉन्वेंट और प्राइवेट स्कूलों की टक्कर का बनाना है। बैठक में इस प्रोजेक्ट के तहत चल रहे कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत निम्नलिखित सुविधाएं विकसित की जा रही हैं:

  • स्मार्ट क्लासेस और कंप्यूटर लैब: बच्चों को आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए।
  • विज्ञान प्रयोगशालाएं व पुस्तकालय: प्रैक्टिकल ज्ञान और स्वाध्याय को बढ़ावा देने के लिए।
  • मूलभूत सुविधाएं: स्कूलों में साफ पेयजल, आधुनिक शौचालय और चौबीस घंटे बिजली की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से दुरुस्त किया जा रहा है।

​अपर मुख्य सचिव ने कहा कि 'प्रोजेक्ट अलंकार' के जरिए सरकारी स्कूलों को ऐसे आधुनिक शिक्षण संस्थानों के रूप में बदला जा रहा है, जहां गरीब से गरीब बच्चा भी बेहतरीन और तकनीक-आधारित शिक्षा पा सके।

​3. शिक्षक स्थानांतरण (Teachers Transfer) में बरती जाएगी पूरी पारदर्शिता

​अक्सर शिक्षकों के तबादलों को लेकर उठने वाले सवालों पर विराम लगाते हुए पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर सोर्स-सिफारिश या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई खामी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

​4. डिजिटल शिक्षा और नवाचार पर रहेगा मुख्य फोकस

​बैठक के दौरान विभाग के कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी, स्कूलों में छात्रों की दैनिक उपस्थिति बढ़ाना, और शिक्षण में नए-नए प्रयोग (नवाचार आधारित गतिविधियां) शामिल हैं। इसके साथ ही, राज्य में 'डिजिटल शिक्षा' को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियों पर काम करने और उन्हें तुरंत लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी डिजिटल इंडिया की मुहिम से सीधे जुड़ सकें।

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