उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है। गांवों को डिजिटल युग से सीधे जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एक महत्वाकांक्षी परियोजना 'प्रोजेक्ट गंगा' (Government Assisted Network for Growth and Advancement) का भव्य शुभारंभ किया। इस योजना के तहत राज्य की 57,000 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से लैस किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि इंटरनेट की रफ्तार जितनी तेज होगी, प्रदेश के विकास की गति भी उतनी ही दोगुनी होगी।
🚀 'प्रोजेक्ट गंगा' के मुख्य लक्ष्य और फायदे
यह परियोजना केवल इंटरनेट पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में चौतरफा विकास का नया जरिया बनेगी:
- स्मार्ट विलेज का निर्माण: गांवों तक ब्रॉडबैंड पहुंचने से ग्राम पंचायतें 'स्मार्ट विलेज' के रूप में विकसित होंगी।
- लास्ट माइल डिजिटल कनेक्टिविटी: अंतिम छोर पर बैठे ग्रामीण को भी तेज इंटरनेट की सुविधा मिलेगी।
- सुविधाओं का विस्तार: डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन (ऑनलाइन इलाज), ई-गवर्नेंस और कौशल विकास जैसी जरूरी सेवाएं अब सीधे गांवों तक पहुंचेंगी।
- रोजगार के नए अवसर: तकनीक आधारित रोजगार के माध्यम से ग्रामीण युवाओं का पलायन रुकेगा।
💼 1 लाख रोजगार और 20 लाख परिवारों तक पहुंच
प्रोजेक्ट गंगा के माध्यम से उत्तर प्रदेश में एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करने का खाका खींचा गया है। इस परियोजना के जरिए प्रदेश के लगभग 20 लाख परिवारों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का संकल्प लिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए 8,000 से 10,000 डिजिटल सेवा प्रदाता (DSP) तैयार किए जाएंगे। इस पूरे नेटवर्क से राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। योजना के पहले चरण में राज्य के 21 जनपदों में इसका संचालन शुरू किया जा रहा है।
👩💻 'रेवड़ी संस्कृति' पर प्रहार: महिलाओं और युवाओं को मिलेगी उद्यमिता की कमान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने मुफ्त उपहार बांटने वाली राजनीति (रेवड़ी संस्कृति) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा: "हमारा मॉडल ऐसा होना चाहिए जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए, न कि सरकार पर उसकी निर्भरता बढ़ाए। 'प्रोजेक्ट गंगा' इसी टिकाऊ और आत्मनिर्भर मॉडल को आगे बढ़ाने की एक मजबूत कड़ी है।"
सरकार ने बजट 2026-27 के वादे को निभाते हुए इस डिजिटल उद्यमिता अभियान में 8,000 डिजिटल उद्यमियों को आगे बढ़ाने की बात कही है, जिसमें से 50 प्रतिशत (आधे) पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। सीएम योगी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि चयनित युवाओं को विश्वस्तरीय और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे सफल ग्रामीण उद्यमी बन सकें।
🌐 'डिजिटल इंडिया' से 'आत्मनिर्भर भारत' का सफर
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर भी इस योजना की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' विजन को साकार करने वाला बताया। यह कदम 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। पहले चरण में 21 जिलों से शुरू होकर, यह नेटवर्क बहुत जल्द राज्य की सभी न्याय पंचायतों तक फैलाया जाएगा


