UP Teacher Student Ratio 2026: यूपी के 75 जिलों का PTR डेटा जारी, जानें आपके जिले का हाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के सभी 75 जिलों का जिलावार छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR - Pupil-Teacher Ratio) डेटा जारी कर दिया गया है। UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की जमीनी हकीकत बयां कर दी है। रिपोर्ट से साफ है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के मानकों को पूरा करने में उत्तर प्रदेश के कई जिले बेहद पीछे छूट गए हैं, जहां एक-एक शिक्षक पर 40 से अधिक बच्चों को पढ़ाने का भारी दबाव है।
क्या हैं RTE अधिनियम के मानक?
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालयों (Primary Schools) के लिए आदर्श छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 (30 छात्रों पर 1 शिक्षक) और उच्च प्राथमिक विद्यालयों (Upper Primary Schools) के लिए 35:1 निर्धारित है। लेकिन जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, यूपी के कई जिलों में यह अनुपात पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है।
इन जिलों में है शिक्षकों की भारी कमी (हाई-रिस्क ज़ोन)
रिपोर्ट के अनुसार, देवीपाटन मंडल और तराई तथा पूर्वी यूपी के कुछ जिलों में छात्र नामांकन अधिक होने के कारण शिक्षकों की भारी कमी देखी जा रही है। यहाँ शिक्षकों पर कार्यभार का दबाव सबसे ज्यादा है:
- श्रावस्ती: प्रदेश में सबसे खराब स्थिति श्रावस्ती की है, जहाँ PTR 46:1 है।
- बहराइच: यहाँ छात्र-शिक्षक अनुपात 45:1 पर पहुंच गया है।
- बलरामपुर: इस जिले में भी स्थिति चिंताजनक है, जहाँ PTR 44:1 है।
- गोण्डा: देवीपाटन मंडल के इस जिले में 43:1 का अनुपात दर्ज किया गया है।
- कुशीनगर: पूर्वी यूपी के कुशीनगर में PTR 42:1 है।
- सिद्धार्थनगर व महाराजगंज: सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जिलों में अनुपात 41:1 है, जो मानकों से कहीं अधिक है।
- लखीमपुर खीरी: यहाँ का छात्र-शिक्षक अनुपात 40:1 है।
इसके अलावा सीतापुर (38:1), सम्भल (38:1), सोनभद्र (37:1), जौनपुर (36:1) और बदायूं (36:1) जैसे जिलों में भी शिक्षकों की कमी साफ दिखाई दे रही है, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
इन जिलों की स्थिति है 'संतोषजनक'
रिपोर्ट में कुछ ऐसे जिले भी सामने आए हैं जहाँ RTE मानकों का बेहतर पालन हो रहा है या स्थिति नियंत्रण में है:
- कानपुर नगर: पूरे प्रदेश में सबसे बेहतर स्थिति कानपुर नगर की है, जहाँ PTR 24:1 है, जो मानक से भी बेहतर है।
- बुंदेलखंड क्षेत्र (महौबा व जालौन): महोबा और जालौन जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 25:1 दर्ज किया गया है, जो काफी संतोषजनक है।
- बागपत व हमीरपुर: इन दोनों जिलों में PTR 26:1 है।
- झाँसी, इटावा और गौतम बुद्ध नगर: इन जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 27:1 बना हुआ है।
प्रमुख मंडलों का एक नजर में हाल (UDISE+ डेटा):
- लखनऊ मंडल: लखीमपुर खीरी (40:1) और सीतापुर (38:1) में स्थिति खराब है, जबकि राजधानी लखनऊ में अनुपात 28:1 है।
- गोरखपुर मंडल: महाराजगंज (41:1) और कुशीनगर (42:1) में शिक्षकों की कमी है, जबकि गोरखपुर जिला 33:1 पर है।
- प्रयागराज मंडल: प्रयागराज (32:1), फतेहपुर (30:1), कौशाम्बी (35:1) और प्रतापगढ़ (34:1) के साथ यह मंडल लगभग सामान्य स्थिति में है।
- मेरठ मंडल: मेरठ (28:1), गाजियाबाद (29:1) और गौतम बुद्ध नगर (27:1) के साथ स्थिति काफी हद तक संतुलित है।
नोट: यह डेटा जिला-स्तरीय समेकित औसत (District Consolidated Average) पर आधारित है। ब्लॉक स्तर या व्यक्तिगत विद्यालय स्तर पर स्थानीय छात्र संख्या के अनुसार इसमें भिन्नता होना संभव है।






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