लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे बीएड (B.Ed.) छात्रों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने बीएड पाठ्यक्रम के व्यावहारिक प्रशिक्षण को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट बीएड कॉलेजों के छात्रों के लिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में इंटर्नशिप करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कमर कसते हुए सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
शासन और NCTE के नियमों के तहत लिया गया फैसला
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) प्रताप सिंह बघेल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह नई व्यवस्था शासन के 30 अप्रैल 2026 के निर्देशों और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों के तहत लागू की जा रही है।
वैकल्पिक व्यवस्था का भी प्रावधान: विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में राजकीय माध्यमिक विद्यालय उपलब्ध नहीं होंगे, वहां बीएड प्रशिक्षुओं को वित्तपोषित सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में भेजा जाएगा ताकि उनकी इंटर्नशिप में कोई बाधा न आए।
इस तरह होगी आवंटन की प्रक्रिया (कॉलेजों को मिली जिम्मेदारी)
पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक रूपरेखा तैयार की है:
- सूची तैयार करना: सभी सरकारी और निजी बीएड कॉलेजों को अपने छात्र-छात्राओं की पूरी सूची संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को सौंपनी होगी।
- अधिकारियों का समन्वय: DIOS क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर इन छात्रों की प्रोफाइल के आधार पर माध्यमिक विद्यालयों का आवंटन करेंगे।
- समय सीमा: विभाग ने निर्देश दिए हैं कि आवंटन की यह प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी की जाए ताकि छात्रों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
भावी शिक्षकों और स्कूलों दोनों को होगा बड़ा फायदा
इस नई इंटर्नशिप नीति का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि भावी शिक्षकों को जमीनी हकीकत से रूबरू कराना है। इससे दोनों पक्षों को बड़े लाभ होंगे:
प्रशिक्षुओं (छात्रों) को मिलने वाले लाभ:
- वास्तविक शिक्षण अनुभव: छात्रों को क्लासरूम में लाइव पढ़ाने और बच्चों से सीधे संवाद करने का मौका मिलेगा।
- कौशल विकास: लेसन प्लान (पाठ योजना) तैयार करना, छात्रों का मूल्यांकन और क्लास मैनेजमेंट (कक्षा प्रबंधन) की बारीकियां सीखने को मिलेंगी।
- सीनियर का मार्गदर्शन: स्कूल के अनुभवी शिक्षकों की देखरेख में छात्र अपनी शिक्षण क्षमता को और निखार सकेंगे।
विद्यालयों को होने वाले लाभ:
- युवा ऊर्जा का साथ: सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों को नए जमाने के उत्साही प्रशिक्षु शिक्षकों का सहयोग मिलेगा।
- शैक्षणिक मजबूती: अतिरिक्त शिक्षकों की मौजूदगी से पठन-पाठन का स्तर सुधरेगा और सह-पाठ्यक्रम (एक्स्ट्रा-करिकुलर) गतिविधियों को बेहतर ढंग से आयोजित किया जा सकेगा।
शिक्षा विभाग को पूरा भरोसा है कि इस कदम से न केवल भविष्य के शिक्षक अधिक पेशेवर और कुशल बनेंगे, बल्कि उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) में भी एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।


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