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लखनऊ में 5000 शिक्षकों का वेतन अटका: जनगणना ड्यूटी बनी जी का जंजाल, जानिए क्या है पूरा मामला

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के एक कड़े फैसले ने तूल पकड़ लिया है। अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनगणना (Census) ड्यूटी पूरी करने के बावजूद लखनऊ जिले के करीब 5,000 प्राथमिक शिक्षकों का मई महीने का वेतन (Salary) रोक दिया गया है। इस सामूहिक कार्रवाई से ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षकों में भारी नाराजगी और मानसिक तनाव का माहौल है।

Lucknow teachers salary stopped due to census duty issue

​शिक्षकों का साफ कहना है कि "कुछ लोगों की लापरवाही की सजा पूरे शिक्षक समुदाय को नहीं दी जानी चाहिए।"

​आखिर क्या है वेतन रोकने की मुख्य वजह?

​लखनऊ जिले के लगभग 1,500 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में करीब 5,000 शिक्षक तैनात हैं। इनमें से 3,000 से ज्यादा शिक्षकों को प्रशासन द्वारा जनगणना कार्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

  • प्रशासन का रुख: जिला प्रशासन को रिपोर्ट मिली कि कुछ शिक्षकों ने अपनी जनगणना ड्यूटी जॉइन नहीं की या दिए गए कार्य को अधूरा छोड़ दिया।
  • सख्त कार्रवाई: इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन के निर्देश पर ट्रेजरी (कोषागार) ने मई माह का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया।
  • सामूहिक मार: इस आदेश की गाज न केवल काम न करने वालों पर, बल्कि उन हजारों शिक्षकों पर भी गिर गई जिन्होंने भीषण गर्मी में मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी पूरी की थी।
शिक्षकों की आर्थिक तंगी: वेतन रुकने से शिक्षकों के सामने महीने की शुरुआत में ही बड़ा संकट खड़ा हो गया है। घर का खर्च, बच्चों की स्कूल फीस, बैंक लोन की ईएमआई (EMI) और गाड़ियों की किस्तें समय पर न जाने से उनका पूरा आर्थिक बजट बिगड़ गया है।

​'दोषी को सजा मिले, निर्दोष को राहत' – शिक्षकों ने उठाए सवाल

    ​इस कार्रवाई के विरोध में शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की है। शिक्षकों का तर्क बेहद व्यावहारिक है:

    1. रिकॉर्ड होने के बाद भी ऐसी कार्रवाई क्यों? प्रशासन के पास ड्यूटी पर आने वाले और अनुपस्थित रहने वाले सभी कर्मचारियों का पूरा डेटा उपलब्ध है।
    2. मनोबल पर असर: बिना जांच के सबका वेतन रोक देने से ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षकों का मनोबल टूटता है।
    3. मांग: दोषी कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ अलग से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, न कि सामूहिक रूप से सबको प्रताड़ित किया जाए।

    ​BSA का आश्वासन: दो दिन के भीतर जारी होगा वेतन

    ​बढ़ते विवाद और शिक्षकों के आक्रोश को देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विपिन कुमार ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया है।

    • दोषियों की पहचान जारी: बीएसए ने सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) से जनगणना ड्यूटी से गायब रहने वाले शिक्षकों की सूची तलब की है।
    • जल्द मिलेगी राहत: उन्होंने आश्वासन दिया है कि जिन शिक्षकों ने अपनी ड्यूटी पूरी कर ली है, उनका वेतन अगले दो दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा। केवल ड्यूटी से नदारद रहने वाले शिक्षकों पर ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    ​जनगणना कार्य को लेकर सख्त मूड में प्रशासन

    ​देश और राज्य स्तर पर सटीक नीतियां बनाने के लिए जनगणना के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश प्रशासन इस कार्य में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

    ​उत्तर प्रदेश के कई जिलों से ऐसी भी खबरें आई हैं जहां जनगणना ड्यूटी से गायब रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) तक दर्ज कराई गई है। लखनऊ का यह मामला भी इसी प्रशासनिक सख्ती का हिस्सा है, लेकिन 'सबको एक ही लाठी से हांकने' की इस नीति ने फिलहाल एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब शिक्षकों की नजरें बीएसए के दो दिन के भीतर वेतन जारी करने के वादे पर टिकी हुई हैं।