उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने समेकित शिक्षा (Inclusive Education) कार्यक्रम के अंतर्गत दिव्यांग (CWSN) बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के 50 चयनित जनपदों में नए रिसोर्स रूम (Resource Room) स्थापित किए जाएंगे। इन रिसोर्स रूम की स्थापना एवं आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए प्रति रिसोर्स रूम ₹2 लाख की दर से कुल ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस संबंध में सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
क्या होता है रिसोर्स रूम?
रिसोर्स रूम एक विशेष शिक्षण कक्ष होता है, जहां दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार शैक्षिक सहायता, प्रशिक्षण एवं थेरेपी उपलब्ध कराई जाती है। यहां विशेष शिक्षक (Special Educator) और आवश्यकता पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट बच्चों को व्यक्तिगत रूप से सहयोग प्रदान करेंगे। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना है।
50 जिलों में स्थापित होंगे नए रिसोर्स रूम
विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार प्रदेश के 50 चयनित जिलों में एक-एक रिसोर्स रूम स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक रिसोर्स रूम के लिए ₹2 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। इस प्रकार कुल 50 रिसोर्स रूम के लिए ₹1 करोड़ का बजट जारी किया गया है। इन रिसोर्स रूम का चयन पूर्व निर्धारित विकास खंडों में ही किया जाएगा तथा इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
किन बच्चों को मिलेगा लाभ?
रिसोर्स रूम में विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से प्रभावित बच्चों को विशेष सहयोग मिलेगा। इनमें—
- दृष्टि बाधित (Visual Impairment)
- श्रवण बाधित (Hearing Impairment)
- वाक एवं भाषा संबंधी समस्या वाले बच्चे
- बौद्धिक दिव्यांगता
- अस्थि बाधित
- सेरेब्रल पाल्सी
- बहु-दिव्यांगता से प्रभावित बच्चे
आदि शामिल हैं। यहां बच्चों को उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
रिसोर्स रूम में उपलब्ध होंगे आधुनिक उपकरण
आदेश के साथ विस्तृत उपकरण सूची भी जारी की गई है। रिसोर्स रूम में श्रवण, दृष्टि एवं बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए अलग-अलग शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से—
- स्पीच ट्रेनर एवं श्रवण प्रशिक्षण उपकरण
- ब्रेल किट एवं ब्रेल पुस्तकें
- लो विजन किट
- टैक्टाइल मैप एवं टैक्टाइल पुस्तकें
- सांकेतिक भाषा सामग्री
- फ्लैश कार्ड एवं चित्र आधारित शिक्षण सामग्री
- पजल, लर्निंग गेम एवं गतिविधि सामग्री
- फिजियोथेरेपी उपकरण (जहां फिजियोथेरेपिस्ट कार्यरत हैं)
- स्मार्ट टीवी (43 इंच)
- ब्लूटूथ स्पीकर
- व्हाइट बोर्ड
- बच्चों के लिए विशेष फर्नीचर
- स्टील अलमारी एवं अन्य आवश्यक शिक्षण सामग्री
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
GeM पोर्टल के माध्यम से होगी खरीद
सभी उपकरण एवं सामग्री की खरीद Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित सीमा के भीतर ही सामग्री खरीदी जाए तथा सभी वित्तीय नियमों का पालन किया जाए। खरीद से संबंधित समस्त अभिलेख एवं बिल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिला स्तर पर गठित होगी समिति
रिसोर्स रूम की स्थापना एवं उपकरण खरीद की निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। समिति में मुख्य विकास अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी, जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) तथा एमआईएस प्रभारी सहित अन्य अधिकारी शामिल होंगे। यही समिति खरीद प्रक्रिया एवं कार्यों की निगरानी करेगी।
प्रधानाध्यापक होंगे संचालन के जिम्मेदार
रिसोर्स रूम का संचालन संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक अथवा नामित नोडल शिक्षक की देखरेख में किया जाएगा। विशेष शिक्षक एवं फिजियोथेरेपिस्ट बच्चों को नियमित प्रशिक्षण देंगे। बच्चों के आगमन, उपयोग की गई सुविधाओं तथा प्रशिक्षण का पूरा रिकॉर्ड अलग रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
इन रिसोर्स रूम का लाभ केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि कक्षा 1 से 8 के साथ-साथ माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 से 12) के दिव्यांग विद्यार्थियों को भी आवश्यकता के अनुसार मार्गदर्शन एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
20 जुलाई 2026 तक पूरी करनी होगी प्रक्रिया
सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि रिसोर्स रूम को 20 जुलाई 2026 तक पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाकर उपयोग प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) एवं प्रगति रिपोर्ट राज्य परियोजना कार्यालय को भेजना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही खर्च की जानकारी निर्धारित पोर्टल पर भी दर्ज करनी होगी।
बेसिक शिक्षा विभाग की यह पहल दिव्यांग बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों तथा व्यवस्थित रिसोर्स रूम के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता, आत्मनिर्भरता और विद्यालय से जुड़ाव में सुधार होगा। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और समग्र शिक्षा अभियान के उद्देश्यों को भी मजबूती मिलेगी।





