UP Eco Clubs for Mission LiFE 2026-27: सभी परिषदीय विद्यालयों में इको क्लब गठन अनिवार्य, ₹5000 का बजट जारी, जानें पूरी कार्ययोजना और मासिक गतिविधियाँ
उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश द्वारा 25 जून 2026 को "Eco Clubs for Mission LiFE" के गठन एवं संचालन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार वर्ष 2026-27 में सभी पात्र विद्यालयों में इको क्लब का गठन किया जाएगा तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के संचालन हेतु ₹5000 प्रति विद्यालय की दर से बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य केवल पौधरोपण या स्वच्छता अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना और सतत जीवनशैली (Mission LiFE) को व्यवहार में उतारना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) में भी पर्यावरणीय शिक्षा और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया गया है। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।
क्या है "Eco Clubs for Mission LiFE"?
Mission LiFE (Lifestyle for Environment) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य लोगों की दैनिक जीवनशैली को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। विद्यालय स्तर पर इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए Eco Clubs for Mission LiFE का गठन किया जाएगा।
इस क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, कचरा प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन, वृक्षारोपण तथा सतत विकास जैसे विषयों पर व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा।
इको क्लब गठन के प्रमुख उद्देश्य
शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में इको क्लब के निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं—
- विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
- जल, वन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जिम्मेदारी का भाव पैदा करना।
- ग्रीन हाउस प्रभाव, ओजोन परत, जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण तथा जैव विविधता जैसे विषयों की जानकारी देना।
- अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) तथा पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा देना।
- विद्यालय एवं समुदाय के बीच पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना।
- छात्रों में पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने की आदत विकसित करना।
विद्यालय में इको क्लब का गठन कैसे होगा?
प्रत्येक विद्यालय में एक इको क्लब गठित किया जाएगा जिसकी संरचना निम्न प्रकार होगी—
- प्रधानाध्यापक – संरक्षक (Patron)
- एक शिक्षक – क्लब प्रभारी
- उच्चतम कक्षा का एक सक्रिय छात्र/छात्रा – अध्यक्ष
- प्रत्येक कक्षा से 4-5 छात्र/छात्राएँ – सदस्य
विद्यालय द्वारा क्लब गठन की अधिसूचना जारी की जाएगी और उसे भारत सरकार के निर्धारित पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी तथा गतिविधियों का अभिलेख रखा जाएगा।
प्रत्येक विद्यालय को मिलेगा ₹5000 का बजट
समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2026-27 के अंतर्गत प्रत्येक पात्र विद्यालय को ₹5000 की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
यह बजट चार प्रमुख मदों में खर्च किया जाएगा—
1. पौधरोपण एवं प्रचार-प्रसार – ₹2000
- एक पेड़ माँ के नाम अभियान
- पौधरोपण
- पोस्टर एवं सूचना बोर्ड
- हरित परिसर निर्माण
2. जागरूकता एवं गतिविधियाँ – ₹1000
- रैली
- शपथ ग्रहण
- निबंध, चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता
- ई-वेस्ट एवं प्लास्टिक मुक्त अभियान
3. कम्पोस्ट निर्माण – ₹500
- कम्पोस्ट पिट
- जैविक कचरे का प्रबंधन
- विद्यालय उद्यान हेतु खाद निर्माण
4. स्टेशनरी एवं अभिलेखीकरण – ₹1500
- रजिस्टर
- चार्ट पेपर
- फाइल एवं स्टेशनरी
- गतिविधियों का दस्तावेजीकरण
कुल स्वीकृत बजट ₹5000 रहेगा।
जुलाई से मार्च तक मासिक गतिविधियों का कैलेंडर
जुलाई – स्वस्थ जीवन शैली अपनाना
- इको क्लब का गठन
- "एक पेड़ माँ के नाम 3.0" अभियान
- पौधरोपण
- पौधों की देखभाल
- पर्यावरण जागरूकता रैली
- पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता
- पर्यावरण विषयक वाद-विवाद प्रतियोगिता
अगस्त – दीर्घकालिक खाद प्रणाली अपनाना
- विद्यालय में किचन गार्डन विकसित करना
- कम्पोस्ट खाद तैयार करना
- मोटे अनाजों के महत्व पर जागरूकता
- जैविक खेती को बढ़ावा देना
सितम्बर – ई-वेस्ट कम करना
- ई-वेस्ट संग्रह अभियान
- पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सुरक्षित निस्तारण
- ई-कचरे के दुष्प्रभावों पर जागरूकता कार्यक्रम
- निबंध एवं नुक्कड़ नाटक
अक्टूबर – कचरा कम करना
- Waste Segregation
- 3R (Reduce, Reuse, Recycle)
- कम्पोस्ट पिट निर्माण
- पुनर्चक्रण प्रतियोगिता
- स्वच्छता अभियान
नवम्बर – ऊर्जा बचाना
- बिजली बचाओ अभियान
- ऊर्जा टीम का गठन
- अनावश्यक बिजली उपकरण बंद रखने का अभियान
- सौर ऊर्जा के उपयोग पर जागरूकता
दिसम्बर – पानी बचाना
- जल संरक्षण रैली
- वर्षा जल संचयन पर जागरूकता
- जल गुणवत्ता परीक्षण
- जल स्रोतों का भ्रमण
जनवरी – सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त विद्यालय
- प्लास्टिक मुक्त परिसर
- कपड़े एवं जूट के बैग के उपयोग को बढ़ावा
- प्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर प्रतियोगिताएँ
फरवरी – स्वच्छता एवं मिट्टी संरक्षण
- मिट्टी संरक्षण कार्यक्रम
- स्थानीय पर्यावरणीय स्थलों का भ्रमण
- स्वच्छता अभियान
मार्च – पर्यावरण दिवसों का आयोजन
- 20 मार्च – विश्व गौरैया दिवस
- 22 मार्च – विश्व जल दिवस
- पूरे वर्ष की गतिविधियों की फोटो एवं रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना।
विद्यालयों को क्या-क्या करना होगा?
विद्यालयों को निम्न कार्य अनिवार्य रूप से करने होंगे—
- प्रत्येक माह क्लब की बैठक आयोजित करना।
- सभी विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
- गतिविधियों का रजिस्टर संधारित करना।
- फोटो एवं वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखना।
- डिजिटल डायरी तैयार करना।
- गतिविधियों की ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड करना।
- बजट का पारदर्शी उपयोग करना।
- प्रत्येक व्यय का बिल एवं वाउचर सुरक्षित रखना।
निगरानी एवं मूल्यांकन
इस योजना की निगरानी जिला प्रशासन, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) तथा समग्र शिक्षा के अधिकारियों द्वारा की जाएगी। विद्यालयों में निरीक्षण के दौरान गतिविधियों, व्यय विवरण तथा अभिलेखों की जांच की जाएगी। सभी गतिविधियों की फोटो, वीडियो एवं रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
निष्कर्ष
Eco Clubs for Mission LiFE 2026-27 केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण की संस्कृति विकसित करने का व्यापक अभियान है। इसके माध्यम से बच्चों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास किया जाएगा। यदि विद्यालय निर्धारित मासिक गतिविधियों का प्रभावी ढंग से संचालन करते हैं और उपलब्ध ₹5000 के बजट का नियमानुसार उपयोग करते हैं, तो यह अभियान विद्यालय, समुदाय और पर्यावरण—तीनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।


