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2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET करना होगा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में NCTE के शपथपत्र से स्थिति हुई स्पष्ट

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। देशभर के लाखों शिक्षकों के बीच पिछले कुछ समय से यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करनी होगी। सोशल मीडिया पर इस संबंध में कई तरह के दावे और संदेश लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बीच राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपने शपथपत्र में इस विषय पर विस्तृत कानूनी स्थिति स्पष्ट की है।

सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील संख्या 1385/2025 में दायर शपथपत्र दिनांक 05 मार्च 2025 में NCTE ने शिक्षक भर्ती की न्यूनतम योग्यताओं, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता तथा समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं का पूरा विवरण प्रस्तुत किया है। इस शपथपत्र में वर्ष 1993 से लेकर वर्ष 2017 तक के सभी महत्वपूर्ण कानूनी संशोधनों और अधिसूचनाओं का उल्लेख किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि विभिन्न समयावधियों में नियुक्त शिक्षकों पर TET की शर्त किस प्रकार लागू होती है।

2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET करना होगा या नहीं, NCTE के सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथपत्र की जानकारी

NCTE ने अपने शपथपत्र में बताया है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993 के माध्यम से परिषद की स्थापना की गई थी। इस अधिनियम के तहत परिषद को देशभर में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने तथा शिक्षकों की न्यूनतम योग्यताओं का निर्धारण करने का अधिकार दिया गया। इसी अधिकार का उपयोग करते हुए वर्ष 2001 में पहली बार शिक्षक भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यताओं संबंधी नियम अधिसूचित किए गए। उस समय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) जैसी कोई व्यवस्था अस्तित्व में नहीं थी। इसलिए वर्ष 2001 से लेकर वर्ष 2010 तक हुई सभी नियुक्तियाँ उस समय लागू नियमों के अनुसार की गई थीं।

शपथपत्र में आगे बताया गया है कि वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2010 की अधिसूचना के माध्यम से NCTE को शिक्षकों की न्यूनतम योग्यताओं का निर्धारण करने वाला Academic Authority घोषित किया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 को महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए पहली बार कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को न्यूनतम योग्यता का अनिवार्य हिस्सा बनाया। इसी अधिसूचना के माध्यम से TET व्यवस्था पूरे देश में लागू हुई।

NCTE ने अपने शपथपत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि 11 फरवरी 2011 को जारी दिशानिर्देशों में TET का उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना बताया गया था। इसके बाद 29 जुलाई 2011 की अधिसूचना में पात्रता संबंधी कुछ संशोधन किए गए, लेकिन TET की अनिवार्यता को यथावत रखा गया। बाद में वर्ष 2014 के NCTE विनियमों में भी शिक्षक भर्ती और पदोन्नति के लिए TET को न्यूनतम योग्यता के रूप में बनाए रखा गया तथा स्पष्ट किया गया कि कक्षा 1 से 8 तक की नियुक्तियों में TET से कोई छूट नहीं दी जाएगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथपत्र के अंतिम भाग में NCTE ने नियुक्ति की तिथि के आधार पर स्थिति स्पष्ट की है। परिषद ने कहा है कि 03 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट प्राप्त है और केवल TET न होने के आधार पर उनकी सेवा प्रभावित नहीं की जा सकती। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि 03 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों पर भी TET की अनिवार्यता लागू नहीं होती, क्योंकि उस अवधि में TET व्यवस्था लागू ही नहीं हुई थी। उस समय नियुक्तियाँ वर्ष 2001 के नियमों के अनुसार की गई थीं, इसलिए बाद में लागू हुई TET की शर्त उन पर लागू नहीं की जा सकती।

शपथपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना के बाद होने वाली शिक्षक नियुक्तियों के लिए TET न्यूनतम योग्यता का अनिवार्य भाग बन गया। इसलिए इस तिथि के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना आवश्यक है। यही नियम आगे वर्ष 2011 और वर्ष 2014 के विनियमों में भी जारी रखा गया।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को अब TET करना पड़ेगा। हालांकि NCTE के शपथपत्र में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इसके विपरीत परिषद ने स्पष्ट रूप से बताया है कि TET की अनिवार्यता उस समय से लागू मानी जाएगी जब इसकी अधिसूचना प्रभावी हुई। इसलिए 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET की बाध्यता लागू नहीं होती।

यह शपथपत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे स्वयं NCTE ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है और इसमें शिक्षक भर्ती से संबंधित सभी प्रमुख अधिसूचनाओं एवं कानूनी प्रावधानों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यदि इस विषय पर भविष्य में सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय आता है, तो यह शपथपत्र न्यायालय के समक्ष एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज रहेगा।

निष्कर्षतः, NCTE के शपथपत्र के अनुसार 03 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट प्राप्त है, 03 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू नहीं होती, जबकि 23 अगस्त 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। इसलिए यह कहना कि "2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को TET करना होगा" उपलब्ध आधिकारिक शपथपत्र के आधार पर सही नहीं है। हालांकि इस मामले में अंतिम और बाध्यकारी कानूनी स्थिति सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

📥 NCTE Affidavit
📌 प्रिंट करने हेतु यहाँ से आधिकारिक PDF सुरक्षित करें।

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