नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और होर्मुज स्ट्रेट में उत्पन्न हुए व्यवधानों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। केंद्र सरकार के अनुसार, इन वैश्विक परिस्थितियों के चलते देश में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक आपूर्ति लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई है। इसके बावजूद, आम उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन की मार से बचाने के लिए सरकार प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का भारी नुकसान खुद वहन कर रही है।
वैश्विक संकट और कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के चलते फरवरी से जून के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में लगभग 46% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। चूंकि भारत अपनी घरेलू आवश्यकता का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए इस वैश्विक मूल्य वृद्धि का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ना स्वाभाविक था।
इस बीच, विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार ने पिछले तीन महीनों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम 89 रुपये बढ़ाकर आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। हाल ही में की गई 29 रुपये की मामूली बढ़ोतरी को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में हंगामा खड़ा हो गया है।
सत्ता पक्ष का तर्क: दुनिया में सबसे सस्ती रसोई गैस
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया है कि जब भी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई मामूली बढ़ोतरी होती है, तो विपक्ष द्वारा हंगामा खड़ा कर दिया जाता है। मगर विपक्ष यह क्यों नहीं बताता कि तमाम वैश्विक चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आज भी भारत में रसोई गैस दुनिया के कई देशों की तुलना में सबसे सस्ते दामों पर उपलब्ध कराई जा रही है।
60,000 करोड़ रुपये का अंडर-रिकवरी बोझ
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों के इस भारी आर्थिक बोझ को सीधे आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। वर्तमान में घरेलू एलपीजी पर कुल 'अंडर-रिकवरी' (लागत और वास्तविक बिक्री मूल्य का अंतर) का कुल बोझ लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां और सरकार मिलकर इस भारी वित्तीय नुकसान को वहन कर रही हैं ताकि नागरिकों को अत्यधिक महंगाई का सामना न करना पड़े।
मुख्य बिंदु: एक नज़र में (डाटा तालिका)
- वास्तविक आपूर्ति लागत: ₹1,600 से अधिक प्रति सिलेंडर
- सरकार द्वारा उठाया जा रहा घाटा: लगभग ₹700 प्रति सिलेंडर
- अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि (फरवरी से जून): लगभग 46%
- कुल अंडर-रिकवरी का बोझ: लगभग ₹60,000 करोड़
- उज्जवला लाभार्थियों को प्रत्यक्ष सहायता: ₹300 प्रति सिलेंडर (10.58 करोड़ से अधिक लाभार्थी)
उज्जवला लाभार्थियों को अतिरिक्त सुरक्षा
कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को राहत देने के लिए सरकार की कल्याणकारी योजनाएं निरंतर काम कर रही हैं। देश के 10.58 करोड़ से अधिक प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को इस संकट के दौर में भी प्रति सिलेंडर 300 रुपये की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता (सब्सिडी) जारी रखी गई है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि समाज के सबसे निचले तबके पर इस वैश्विक संकट का कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।



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