उत्तर प्रदेश में संपत्ति निबंधन (रजिस्ट्री) और अन्य प्रशासनिक कार्यों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण जनहित सूचना जारी की गई है। महानिरीक्षक निबंधन (Inspector General of Registration), उत्तर प्रदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधार कार्ड (Aadhaar Card) का उपयोग अब किसी भी व्यक्ति के पारिवारिक या वैधानिक संबंधों के कानूनी प्रमाण के रूप में नहीं किया जा सकेगा।
आम जनता में अक्सर यह धारणा रहती है कि आधार कार्ड में दर्ज पिता या पति का नाम उनके रिश्ते का पुख्ता प्रमाण है। लेकिन प्रशासन ने इस भ्रम को दूर करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आधार केवल पहचान और पते का प्रमाण
महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि आधार कार्ड मुख्य रूप से व्यक्ति की पहचान (Identity) और उसके पते (Address Proof) को प्रमाणित करने का एक दस्तावेज है। इसे किसी भी स्थिति में पारिवारिक या वैधानिक संबंधों का 'अंतिम प्रमाण' नहीं माना जा सकता है।
आदेश की मुख्य और महत्वपूर्ण बातें:
- केवल सूचनात्मक है जानकारी: आधार कार्ड में अंकित पिता, पति, अभिभावक अथवा अन्य संबंधियों का नाम केवल सूचनात्मक (Informational) प्रकृति का होता है।
- C/o, S/o, D/o, W/o कानूनी प्रमाण नहीं: कार्ड पर "C/o" (Care of), "S/o" (Son of), "D/o" (Daughter of) या "W/o" (Wife of) के साथ दर्ज पिता, पति या अभिभावक के नाम मात्र से उसे रिश्ते का कानूनी या वैधानिक प्रमाण नहीं मान लिया जाएगा।
- रजिस्ट्री व प्रशासनिक कार्यों में पाबंदी: किसी भी प्रशासनिक, वैधानिक या संपत्ति निबंधन (रजिस्ट्री) से जुड़ी कार्यवाही में अब केवल आधार कार्ड के बलबूते पारिवारिक संबंधों का सत्यापन (Verification) मान्य नहीं होगा।
रिश्ता साबित करने के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निबंधन या कानूनी कार्यों में आधार कार्ड से संबंध साबित नहीं होंगे, तो आम जनता को किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जहां भी पारिवारिक या उत्तराधिकार का संबंध प्रमाणित करना अनिवार्य हो, वहां लोगों को निम्नलिखित वैध अभिलेखों का उपयोग करना होगा:
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- परिवार रजिस्टर की प्रमाणित नकल
- उत्तराधिकार संबंधी अभिलेख (Succession Records)
- सक्षम न्यायालय अथवा प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र
यह नया आदेश उन सभी नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो वसीयत, जमीन की खरीद-बिक्री या अन्य कानूनी कार्यों के लिए पूरी तरह से आधार कार्ड पर निर्भर रहते हैं। आगे किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन या देरी से बचने के लिए, आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे पारिवारिक संबंध साबित करने के लिए ऊपर बताए गए अन्य वैध दस्तावेजों को हमेशा अपने साथ तैयार रखें।





