लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बारिश के मौसम के साथ ही संचारी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसी से निपटने के लिए प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बड़ा और सघन अभियान शुरू करने जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने इस महा-अभियान की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है और अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मच्छरों व जलभराव से पनपने वाली बीमारियों पर लगाम लगाना और लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
दो चरणों में चलेगा महा-अभियान
अपर मुख्य सचिव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश भर में यह स्वास्थ्य अभियान दो प्रमुख हिस्सों में संचालित किया जाएगा:
- संचारी रोग नियंत्रण अभियान: यह 1 जुलाई से शुरू होकर 31 जुलाई तक चलेगा।
- दस्तक अभियान: यह 11 जुलाई से 31 जुलाई तक चलाया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर दस्तक देंगे।
ई-कवच पोर्टल (e-Kavach Portal) से होगी डिजिटल निगरानी
अमित घोष ने स्पष्ट किया है कि तकनीक का भरपूर उपयोग किया जाएगा। दस्तक अभियान के दौरान यदि किसी भी व्यक्ति में संचारी रोग के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसका नाम, पता और मोबाइल नंबर सहित पूरा विवरण तुरंत 'ई-कवच पोर्टल' पर डिजिटल रूप से अपलोड किया जाएगा। अत्यधिक जोखिम वाले (हाई-रिस्क) क्षेत्रों में कई विभागों के आपसी सहयोग से सघन मच्छर नियंत्रण और वेक्टर कंट्रोल गतिविधियां चलाई जाएंगी।
आशा और ANM की भूमिका एवं ट्रेनिंग
अभियान की सफलता का दारोमदार ग्राउंड लेवल के स्वास्थ्य कर्मियों पर है। इसके लिए कुछ खास निर्देश जारी किए गए हैं:
- माइक्रो-प्लानिंग: सभी जिलों में 29 जून को दूसरी जिला स्तरीय अंतर-विभागीय बैठक होगी, जिसमें ब्लॉक स्तर तक की माइक्रो-प्लानिंग की जाएगी।
- ट्रेनिंग: आशा, एएनएम (ANM) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का विशेष प्रशिक्षण हर हाल में 8 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा।
- मेडिकल किट: आशा बहुओं और एएनएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर भ्रमण के दौरान अपने साथ ओआरएस (ORS) और जिंक की गोलियां अनिवार्य रूप से रखें। दस्त या अन्य लक्षणों वाले मरीजों की पहचान होते ही उन्हें तत्काल यह राहत पहुंचाई जाएगी।
खाद्य पदार्थों में मिलावट और गंदगी पर कसेगी नकेल
अपर मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को भी सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा है कि बाजार में खुले खाद्य पदार्थों, कटे-फटे या सड़े हुए फल-सब्जियों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही, अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किए जा रहे फलों और गन्ने के जूस की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जाए ताकि संक्रमण न फैले।
स्कूली बच्चों को किया जाएगा जागरूक
विद्यालयों में भी स्वास्थ्य जागरूकता की अलख जगाई जाएगी। छात्रों को विशेष रूप से बताया जाएगा कि यदि किसी को कोई जानवर काट ले (जैसे कुत्ता या बंदर), तो प्राथमिक उपचार के रूप में घाव को सबसे पहले बहते हुए स्वच्छ पानी से धोना चाहिए। इसके प्रदर्शन के साथ-साथ स्कूलों में इससे संबंधित प्रतियोगिताएं आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
क्षय रोग, फाइलेरिया और कुष्ठ रोग पर भी रहेगा फोकस
यह अभियान केवल मौसमी बीमारियों तक सीमित नहीं रहेगा। फ्रंटलाइन वर्कर्स प्रदेश के सभी 75 जनपदों में घर-घर भ्रमण कर क्षय रोग (टीबी), कुष्ठ रोग, फाइलेरिया और काला आजार जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति भी लोगों को जागरूक करेंगे और संदिग्ध मरीजों की पहचान करेंगे।
रिपोर्टिंग और शपथ ग्रहण
अभियान की शुरुआत 1 जुलाई को सभी सरकारी कार्यालयों और विद्यालयों में शपथ ग्रहण कार्यक्रम के साथ होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर सोमवार को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट भेजें और अभियान खत्म होने के बाद 5 अगस्त तक अंतिम रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को सौंपना सुनिश्चित करें।


