प्रयागराज: उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग का वह दावा पूरी तरह से खोखला साबित होता दिख रहा है, जिसमें कहा गया था कि परीक्षा केंद्र मंडल के बाहर नहीं बनाए जाएंगे। आगामी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के लिए कई अभ्यर्थियों को 250 से 300 किलोमीटर दूर के परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिए गए हैं। दूर-दराज केंद्र मिलने से अभ्यर्थियों में भारी रोष और परेशानी है। परीक्षा 2, 3 और 4 जुलाई को प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी। प्रथम पाली सुबह 9:30 से दोपहर 12:00 बजे तक और द्वितीय पाली दोपहर 2:30 से शाम 5:00 बजे तक चलेगी। इस परीक्षा को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए प्रदेश के 60 जिलों में कुल 955 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
परीक्षा केंद्रों की दूरी को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। देवरिया जिले में कुल 23,283 अभ्यर्थी हैं, जिनमें से 2668 अभ्यर्थियों को 250 किलोमीटर दूर 'वाराणसी' भेज दिया गया है। इसके अलावा 4232 अभ्यर्थियों को 100 किमी दूर आजमगढ़, 9784 को कुशीनगर तथा अन्य को गाजीपुर और 125 किमी दूर बस्ती भेजा गया है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि आयोग चाहता तो उन्हें महज 55 किमी दूर गोरखपुर भी भेज सकता था। हालांकि, इन सबके बीच थोड़ी राहत की बात यह है कि 383 दिव्यांग अभ्यर्थियों का परीक्षा केंद्र उनके गृह जिले में ही रखा गया है। वहीं, प्रयागराज के 62,935 अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के लिए प्रतापगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर और वाराणसी जैसे जिलों की दौड़ लगानी पड़ेगी।
उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने इस अव्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे अभ्यर्थियों के समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होगी। इस पूरे मामले पर बढ़ते विवाद को देखते हुए आयोग के उप सचिव संजय सिंह ने सफाई दी है। उनका कहना है कि परीक्षा केंद्र आसपास के जिलों में ही निर्धारित किए गए हैं। उनका तर्क है कि देवरिया के केवल 2668 अभ्यर्थियों को ही वाराणसी भेजा गया है, जबकि बाकी को अगल-बगल के जिलों में जगह दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि महिला अभ्यर्थियों को उनके पड़ोस के जिलों में ही परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं।


