लखनऊ। मिडिल ईस्ट (विशेष रूप से अमेरिका, ईरान और इजराइल) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरी दुनिया इस समय गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रही है। भारत पर इसके बढ़ते प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास विभाग द्वारा राज्य के सभी नगरीय निकायों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और समयबद्ध शासनादेश जारी किया गया है। इसके तहत पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर 'ईंधन एवं ऊर्जा संरक्षण अभियान' चलाने का निर्णय लिया गया है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कमी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और जनसामान्य पर पड़ रहा है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रव्यापी स्तर पर ईंधन संरक्षण की अपील के बाद, उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग ने इसे प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है। जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य न केवल ईंधन की खपत को कम करना है, बल्कि सरकारी खर्चों में कटौती और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना भी है।
1. वर्चुअल मीटिंग (Virtual Meeting) का अधिकतम उपयोग
सरकारी यात्राओं में ईंधन की बर्बादी को रोकने के लिए नगर विकास विभाग के अंतर्गत होने वाली सभी बैठकों को यथासंभव ऑनलाइन मोड पर आयोजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इंटर-डिस्ट्रिक्ट रिव्यू मीटिंग, ट्रेनिंग प्रोग्राम, विभागीय सेमिनार और स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया है।
2. गैर-आवश्यक सरकारी खर्चों और एसी (AC) के उपयोग पर पाबंदी
विभाग ने अगले 7 महीनों के लिए सभी गैर-आवश्यक फॉरेन-फंडेड ट्रैवल, स्टडी टूर्स और कंसल्टेंसी असाइनमेंट्स पर पूरी तरह रोक (Freeze) लगा दी है। इसके अलावा, सभी कार्यालय भवनों में एयर कंडीशनिंग (AC), लाइटिंग और लिफ्ट के उपयोग का ऑडिट किया जाएगा और शाम 7 बजे के बाद सभी गैर-जरूरी उपकरणों का उपयोग बंद कर दिया जाएगा। कार्यालयों में एसी का तापमान भी 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही निर्धारित करना होगा।
3. ईंधन की खपत में कमी और व्यावहारिक बदलाव
अधिकारियों और कर्मचारियों को पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों और साइकिलिंग को अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, शहरों में बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन के माध्यम से जाम के कारण व्यर्थ होने वाले ईंधन को बचाने पर जोर दिया गया है। कार्यालय में उपयोग हो रहे 10 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों का विशेष ऊर्जा ऑडिट (Energy Audit) कराया जाएगा।
4. सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहनों को बढ़ावा
शहरी क्षेत्रों में अधिक मांग वाले मार्गों पर बसों के फेरे (Frequency) बढ़ाए जाएंगे। पीक-आवर सेवाओं में सुधार लाकर नगरीय परिवहन की बसों की समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की सुचारू आवाजाही के लिए नए चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे।
5. साइकिलिंग और पैदल आवागमन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर
प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में 5 से 10 किलोमीटर के 'साइकिल कॉरिडोर' चिह्नित कर उनका निर्माण किया जाएगा। मेट्रो स्टेशनों, सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के पास पब्लिक साइकिल-शेयरिंग योजनाओं का विस्तार होगा। पर्यावरण और ईंधन संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी के साथ "Cycle to Office" सप्ताह का आयोजन किया जाएगा।
स्ट्रीट लाइट प्रबंधन पर सख्त निर्देश: प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों (जिसमें 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायतें शामिल हैं) को आदेश दिया गया है कि निर्धारित समय से पूर्व या उजाला होने के बाद स्ट्रीट लाइटें जलती न छोड़ी जाएं। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जवाबदेह अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सजावटी और अनावश्यक स्पाइरल लाइटों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
परंपरागत ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया है। नगरीय निकायों की सीमा के अंतर्गत जैविक कचरे के उपयोग से कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) उत्पादक इकाइयों तथा गोवर्धन (GobarDhan) प्रोजेक्ट्स को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा। निकायों में लंबित पड़ी सभी CBG प्लांट्स की फाइलों की पहचान कर 30 दिनों के भीतर उनके अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।




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