लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों से रूबरू होंगे। राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूली शिक्षा को डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा ने टाटा एंटरप्राइजेज की कंपनी नेल्को लिमिटेड (Nelco Limited) के साथ एक समझौता (MoU) किया है।
3 चरणों में विकसित होगा 'हब एंड स्पोक' मॉडल
प्रदेश के सभी 75 जिलों के 600 राजकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को इस योजना के तहत कवर किया जाएगा। इसमें कुल 150 'हब' और 450 'स्पोक' स्कूल शामिल होंगे। इस पूरी परियोजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा:
- पहला चरण: 18 हब और 54 स्पोक विद्यालयों में लैब की शुरुआत होगी।
- दूसरा चरण: इसके तहत 36 हब और 108 स्पोक विद्यालयों को जोड़ा जाएगा।
- तीसरा चरण: अंतिम चरण में 96 हब और 288 स्पोक विद्यालयों में ड्रोन लैब स्थापित की जाएंगी।
इन आधुनिक तकनीकों का मिलेगा व्यावहारिक (Practical) ज्ञान
इन 600 स्कूलों में स्थापित होने वाली ड्रोन लैब्स को आधुनिक नवाचार और कौशल विकास केंद्रों के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहाँ छात्रों को केवल थ्योरी नहीं, बल्कि निम्नलिखित एडवांस्ड टॉपिक्स पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी:
- भविष्य की तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा विज्ञान (Data Science)
- इंजीनियरिंग व मेकिंग: रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, उन्नत विनिर्माण और डिजाइन थिंकिंग
- स्मार्ट गैजेट्स: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स
- ग्रीन एनर्जी व मोबिलिटी: बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और नवीकरणीय ऊर्जा की तकनीक
शिक्षा मंत्री की मौजूदगी में हुआ समझौता
इस ऐतिहासिक परियोजना पर बेसिक व माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका एस. गर्ग और टाटा नेल्को के प्रतिनिधियों ने एमओयू की प्रक्रिया पूरी की।
राज्य परियोजना निदेशक कंचन वर्मा ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के बच्चों को समान अवसर देना है।
रोजगार और भविष्य के लिए तैयार होंगे छात्र
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी बड़े निजी संस्थानों की तरह आधुनिक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी। इससे न सिर्फ छात्रों की सोच इनोवेटिव होगी, बल्कि वे भविष्य में रोजगार के नए अवसरों और वैश्विक तकनीकी बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकेंगे।


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