लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों पर अब कानून का शिकंजा कसने जा रहा है। मानव संपदा पोर्टल पर चल रही गहन जांच के दौरान शिक्षा विभाग ने एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि 11 ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने एक ही शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अंकपत्र का उपयोग कर अलग-अलग स्थानों पर नियुक्तियां प्राप्त की हैं।
पोर्टल ने खोली पोल
यह मामला तब प्रकाश में आया जब बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों के शैक्षणिक और सेवा संबंधी रिकॉर्ड का डिजिटल मिलान किया जा रहा था। तकनीकी जांच के दौरान सिस्टम ने समान अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों पर 'डबल आईडी' वाले शिक्षकों को फ्लैग किया। एक ही रिकॉर्ड पर दो अलग-अलग व्यक्तियों की नियुक्ति पाए जाने पर विभाग में हड़कंप मच गया।
इन जिलों में मिले फर्जी शिक्षक
प्रारंभिक जांच में प्रदेश के सात जिलों में इस जालसाजी की पुष्टि हुई है:
- गाजीपुर और वाराणसी
- सुलतानपुर और आजमगढ़
- बलरामपुर, आगरा और चंदौली
सख्त कार्रवाई के निर्देश
बेसिक शिक्षा विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उच्चाधिकारियों ने संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश दिए हैं कि इन सभी 11 शिक्षकों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए। इसके साथ ही उनकी नियुक्तियों को रद्द करने और अब तक प्राप्त किए गए वेतन की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
जारी रहेगी जांच
विभागीय सूत्रों का कहना है कि मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से डेटा के डिजिटलीकरण ने पारदर्शिता बढ़ाई है। अभी पोर्टल पर अन्य शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन भी जारी है, जिससे आने वाले दिनों में फर्जी शिक्षकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार की इस कार्रवाई से उन लोगों में खौफ है जो गलत तरीके से सिस्टम में सेंध लगाकर नौकरी कर रहे हैं।


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