नई दिल्ली/जयपुर: केंद्र सरकार ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए पूरी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा पर पिछले कई दिनों से पेपर लीक के बादल मंडरा रहे थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई है और जल्द ही नई तिथियों की घोषणा की जाएगी।
23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में
इस वर्ष नीट परीक्षा के लिए देश-विदेश के 565 शहरों में लगभग 22.79 लाख (करीब 23 लाख) छात्रों ने पंजीकरण कराया था। परीक्षा रद्द होने के फैसले ने लाखों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कड़ा फैसला जरूरी था।
जांच का जिम्मा अब CBI के पास
एनटीए के अनुसार, जांच एजेंसियों से मिले इनपुट इस ओर इशारा कर रहे हैं कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता भंग हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। सीबीआई अब इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करेगी जो इस संभावित पेपर लीक के पीछे सक्रिय था।
राजस्थान से जुड़े हैं पेपर लीक के तार?
इस पूरे मामले का खुलासा राजस्थान से शुरू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार:
- गेस पेपर का मिलान: 3 मई को परीक्षा के तुरंत बाद राजस्थान में कुछ छात्रों के पास हाथ से लिखे 'गेस पेपर' मिलने की खबरें आईं। दावा किया गया कि इस पेपर के कई सवाल मुख्य परीक्षा के सवालों से हूबहू मिलते थे।
- बड़ी गिरफ्तारियां: 10 मई को राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून, सीकर और झुंझुनू से 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया। इनमें सीकर के एक नामी कोचिंग संस्थान का करियर काउंसलर भी शामिल है।
- 410 सवालों का खेल: एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक, जांच उस गेस पेपर पर टिकी है जिसमें 410 सवाल थे। आरोप है कि केमिस्ट्री के करीब 120 सवाल इसी पेपर से आए थे और यह पेपर परीक्षा से 15 दिन से एक महीने पहले ही बाजार में घूम रहा था।
हाई-टेक सुरक्षा भी हुई फेल!
हैरानी की बात यह है कि एनटीए ने इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे:
- GPS ट्रैकिंग: प्रश्न-पत्रों को जीपीएस युक्त वाहनों से भेजा गया था।
- AI निगरानी: परीक्षा केंद्रों पर AI-असिस्टेड CCTV कैमरों से नजर रखी गई थी।
- 5G जैमर्स: केंद्रों पर संचार रोकने के लिए 5G जैमर्स लगाए गए थे।
- बायोमेट्रिक: सभी छात्रों का डिजिटल वेरिफिकेशन किया गया था।
इन तमाम हाई-टेक इंतजामों के बावजूद पेपर लीक के आरोपों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एनटीए ने छात्रों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और चैनलों के माध्यम से आने वाली सूचनाओं पर ही भरोसा करें। परीक्षा की नई तारीखें और नए एडमिट कार्ड का शेड्यूल जल्द ही जारी किया जाएगा। फिलहाल, सभी की नजरें अब सीबीआई की जांच पर टिकी हैं कि आखिर सेंधमारी कहां से हुई।



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