लखनऊ। उत्तर प्रदेश का बेसिक शिक्षा विभाग प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं और अध्यापकों की छिपी हुई प्रतिभा को एक बड़ा मंच देने जा रहा है। विभाग द्वारा जल्द ही एक विशेष त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है। इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में हो रहे बेहतरीन कार्यों, शिक्षकों के अनूठे प्रयासों और बच्चों की रचनात्मकता को दुनिया के सामने लाना है।
इस संबंध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय द्वारा राज्य के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
अक्सर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों द्वारा किए जा रहे 'बेस्ट प्रैक्टिसेस' (उत्कृष्ट तौर-तरीके) और बच्चों की बनाई पेंटिंग्स या कविताएं स्कूल की दीवारों तक ही सीमित रह जाती हैं। इस त्रैमासिक पत्रिका के माध्यम से विभाग का लक्ष्य है कि:
- सराहना: राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरस्कृत शिक्षकों के कार्यों को पहचान मिले।
- प्रेरणा: 'बेस्ट लर्निंग आउटकम' यानी बच्चों को सिखाने के सबसे बेहतरीन तरीकों को अन्य स्कूलों के साथ साझा किया जाए।
- सृजनशीलता: छात्रों और शिक्षकों द्वारा लिखे गए लेख, कहानियां, कविताएं और संस्मरणों को प्रकाशित किया जाए।
- पर्यावरण और समाज: पर्यावरण संरक्षण के लिए स्कूलों में किए जा रहे प्रयासों और सामुदायिक विकास के कार्यों को भी इसमें विशेष स्थान मिलेगा।
यदि आप भी इस पत्रिका का हिस्सा बनना चाहते हैं और अपनी रचना या स्कूल की सफलता की कहानी भेजना चाहते हैं, तो विभाग द्वारा जारी इन ५ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- स्पष्ट तस्वीरें: प्रत्येक रचना या लेख के साथ गतिविधि से जुड़ी एक या दो साफ एचडी (HD) फोटो अवश्य भेजें।
- डिजिटल फॉर्मेट: भेजी जाने वाली सामग्री केवल सॉफ्ट कॉपी में होनी चाहिए। इसे मंगल फॉन्ट (Mangal Font) में टाइप किया गया हो। ध्यान दें: हाथ से लिखे (हस्तलिखित) लेख स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
- पूर्ण परिचय: लेख के साथ भेजने वाले (प्रेषक) का पूरा नाम, पद का नाम, कार्यरत विद्यालय/संस्था का नाम और जनपद (जिला) का उल्लेख साफ-साफ होना चाहिए।
- मौलिकता का प्रमाण: भेजी जा रही कविता, कहानी या लेख पूरी तरह से आपका अपना (मौलिक) होना चाहिए। इसके साथ एक स्व-घोषित मौलिकता प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा।
- समय सीमा और माध्यम: सभी स्वीकृतियां केवल निर्धारित ईमेल आईडी datapatrika@gmail.com पर ही स्वीकार की जाएंगी। इसके लिए विभाग ने आदेश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर का समय तय किया है।


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