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सत्र 2026-27 में रसोइयों के नवीनीकरण हेतु आधिकारिक आदेश जारी। जानें क्या हैं नए नियम?

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UP MDM Cook Selection 2026-27: उत्तर प्रदेश रसोइया नवीनीकरण नियम और शासनादेश

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उत्तर प्रदेश सरकार की 'प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण' (पीएम पोषण), जिसे पूर्व में मध्याह्न भोजन योजना के नाम से जाना जाता था, प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं के पोषण और शिक्षा का आधार है। इस योजना की सफलता की धुरी वे रसोइए हैं जो प्रतिदिन विद्यालयों में स्वच्छ और पौष्टिक भोजन तैयार करते हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के आगमन के साथ ही, मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश ने रसोइयों के नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रिया को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

आदेश से स्पष्ट है कि रसोइयों का चयन और नवीनीकरण अब किसी की इच्छा पर नहीं, बल्कि पूर्व निर्धारित शासनादेशों और पारदर्शी मानकों के आधार पर ही होगा।

1. नवीनीकरण प्रक्रिया का वैधानिक आधार

​सत्र 2026-27 के लिए जारी किए गए निर्देशों में मुख्य रूप से दो ऐतिहासिक शासनादेशों का संदर्भ दिया गया है, जो रसोइयों की सेवा शर्तों को परिभाषित करते हैं:

  1. शासनादेश संख्या-1235/अड़सठ-3-2019-143/2019 (दिनांक 14 अगस्त, 2019)
  2. शासनादेश संख्या-1325/अड़सठ-3-2019-143/2019 (दिनांक 26 सितम्बर, 2019)

​इन आदेशों का मूल उद्देश्य रसोइयों की नियुक्ति में होने वाले अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकना और उनके कार्य की निरंतरता को सुरक्षा प्रदान करना है।

2. रसोइयों के नवीनीकरण हेतु प्रमुख अनिवार्य शर्तें

​आदेश के अनुसार, नवीनीकरण की प्रक्रिया निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के इर्द-गिर्द घूमेगी:

क. सेवा की निरंतरता (कार्य संतोषजनक होने पर)

​आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि विद्यालय में कार्यरत रसोइए की सेवाएं विगत सत्र में संतोषजनक रही हैं, तो उन्हें बिना किसी नई चयन प्रक्रिया के आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकृत कर दिया जाएगा। यह कदम रसोइयों को रोजगार की सुरक्षा प्रदान करता है और अनुभवी रसोइयों के अनुभव का लाभ बच्चों को मिलता रहता है।

ख. पाल्य/बच्चे का विद्यालय में नामांकन

​यह योजना की एक बुनियादी और अनिवार्य शर्त है। रसोइया केवल उसी अवधि तक कार्य करने के लिए पात्र होगा, जब तक उसका अपना कम से कम एक बच्चा या पाल्य उस विशिष्ट विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहा हो। यदि रसोइए का बच्चा विद्यालय छोड़कर चला जाता है या उसकी शिक्षा पूर्ण हो जाती है, तो रसोइए की पात्रता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।

ग. असंतोषजनक सेवा और हटाने की प्रक्रिया

​यदि किसी रसोइए का कार्य संतोषजनक नहीं है, तो उसे हटाने की प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी और तर्कसंगत रखी गई है। किसी को भी मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता। प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • निर्धारण: सेवा के संतोषजनक होने या न होने का निर्धारण ग्राम पंचायत समिति या वार्ड समिति द्वारा किया जाएगा।
  • चेतावनी और साक्ष्य: यदि समिति रसोइए के कार्य से असंतुष्ट है, तो उसे लिखित रूप में सकारण चेतावनी या नोटिस देना अनिवार्य होगा।
  • पक्ष रखने का अवसर: रसोइए के विरुद्ध लगाए गए आरोपों के पक्ष में सुसंगत साक्ष्य होने चाहिए और रसोइए को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
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3. नवीन चयन की प्रक्रिया (यदि पद रिक्त हो)

​नवीनीकरण के साथ-साथ आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कारणवश (जैसे त्यागपत्र, निष्कासन या बच्चे का स्कूल से निकल जाना) रसोइए का पद रिक्त होता है, तो नया चयन शासनादेश दिनांक 24.04.2010 में अंकित प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा। इसमें स्थानीय चयन समिति और पात्रता मानदंडों का कड़ाई से पालन करना होगा।

4. प्राधिकरण की सख्ती और अनुशासन

​विगत वर्षों में यह देखा गया है कि जिला स्तर पर रसोइयों के नवीनीकरण में शासनादेशों की अवहेलना की गई, जिससे कई शिकायतें प्राप्त हुईं। सत्र 2026-27 के लिए जारी पत्र (पत्रांक: म०भो०प्रा०/C-57/2026-27) में निदेशक ने साफ तौर पर कहा है कि:

"संशोधित शासनादेशों में वर्णित व्यवस्था एवं निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है... अतः नवीनीकरण की कार्यवाही में इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।"

​यह सख्त लहजा दर्शाता है कि शासन इस बार किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

5. प्रशासनिक उत्तरदायित्व और निगरानी

​इस आदेश के सफल क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदारी की एक शृंखला निर्धारित की गई है:

  • जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA): जिले के समस्त विद्यालयों में नवीनीकरण प्रक्रिया के पर्यवेक्षण हेतु मुख्य उत्तरदायी।
  • जिलाधिकारी (DM): जिले में योजना की समग्र निगरानी और शिकायतों का निवारण।
  • मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक): क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय और रिपोर्टिंग।
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6. रसोइयों और प्रधानाध्यापकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

​आगामी सत्र में सुचारू संचालन हेतु कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए जा सकते हैं:

  1. दस्तावेजीकरण: प्रधानाध्यापकों को रसोइयों के बच्चों के नामांकन संबंधी रिकॉर्ड अद्यतन रखने चाहिए।
  2. बैठक: ग्राम शिक्षा समिति की बैठक बुलाकर नवीनीकरण की पुष्टि को रजिस्टर में दर्ज करना चाहिए।
  3. स्वास्थ्य और स्वच्छता: नवीनीकरण के समय रसोइयों को व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य के मानकों के प्रति पुनः जागरूक किया जाना चाहिए।

7. निष्कर्ष: एक सुदृढ़ भविष्य की ओर

​मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी यह आदेश रसोइयों के सशक्तीकरण और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 14 अगस्त 2019 और 26 सितम्बर 2019 के शासनादेशों को पुनः प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश यह सुनिश्चित करता है कि पात्र व्यक्तियों को उनका हक मिले और बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा बनी रहे।

​इस आदेश के कड़ाई से पालन से न केवल भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पर अंकुश लगेगा, बल्कि प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 'पीएम पोषण' योजना अपने वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होगी।

प्रस्तुत लेख: मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के पत्रांक C-57/2026-27 एवं संबंधित शासनादेशों के गहन अध्ययन पर आधारित।

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