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शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट सख्त: 20 जून तक आपत्तियों के निस्तारण का आदेश, 3 जुलाई तक तबादलों पर रोक

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) और सरप्लस (अधिशेष) निर्धारण के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की सभी आपत्तियों का निस्तारण 20 जून 2026 तक हर हाल में कर लिया जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 3 जुलाई 2026 तय करते हुए तब तक किसी भी शिक्षक के स्थानांतरण या रीडिप्लॉयमेंट (Redeployment) पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

समायोजन केस

​'First-In, First-Out' के तहत होगा सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण

​हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पूरे राज्य में अधिशेष (Surplus) शिक्षकों की पहचान के लिए एक समान नियम लागू होगा। इसके लिए न्यायालय ने “First-In First-Out” (फर्स्ट-इन फर्स्ट-आउट) सिद्धांत का पालन करने को कहा है।

क्या है नियम: जो शिक्षक विद्यालय में पहले नियुक्त हुआ है, उसे बाद में नियुक्त होने वाले शिक्षक की तुलना में प्राथमिकता दी जाएगी। यानी बाद में आने वाले शिक्षक को पहले अधिशेष माना जाएगा। कक्षा 6 से 8 के विषय अध्यापकों के मामले में यह नियम विषयवार (Subject-wise) लागू होगा।

​इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी परिस्थिति में प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षक बनाए रखने के सिद्धांत का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए।

​छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) और आपत्तियों पर जिला समिति करेगी विचार

​राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि विभिन्न जिलों से शिक्षकों की बड़ी संख्या में आपत्तियां मिली हैं। सरकार ने कोर्ट को बताया कि:

  • ​आपत्तियों के निस्तारण के लिए कम से कम 15 दिन का समय चाहिए।
  • ​इसके बाद अधिशेष शिक्षकों की अंतिम व्यापक सूची तैयार करने में 10 दिन और लगेंगे।

​न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि वैसे तो 30 अप्रैल 2026 के बाद के आंकड़ों पर विचार नहीं होगा, लेकिन यदि किसी शिक्षक की आपत्ति दाखिल करने की तिथि तक नए प्रवेशों के कारण छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) बदल गया है और वह तथ्य सही पाया जाता है, तो जिला स्तरीय समिति (District Level Committee) उस परिवर्तन को संज्ञान में ले सकेगी।

​त्रुटि मिलने पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, DM करेंगे सत्यापन

​हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेटों (DM) को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सबसे पहले सभी सूचियों का गहन सत्यापन करें। इस कार्य को 10 दिनों के भीतर पूरा करने का समय दिया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि सूचियों में कोई भी त्रुटि या गड़बड़ी पाई जाती है, तो न सिर्फ उसमें सुधार किया जाएगा, बल्कि संबंधित दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

​जिन शिक्षकों को न्यायालय से पहले ही अंतरिम संरक्षण (Stay) मिला हुआ है, उनकी स्थिति सूची में अलग से दर्ज की जाएगी। प्रशासन उनके स्थान पर अगली पंक्ति के शिक्षक का नाम वैकल्पिक रूप से प्रस्तावित कर सकेगा।

​गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों पर भी मांगी रिपोर्ट

​शिक्षकों को पढ़ाई से इतर अन्य कार्यों में लगाए जाने पर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में तैनात किए गए शिक्षकों की एक अलग सूची न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

​न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षकों का मुख्य कार्य विद्यार्थियों को शिक्षा देना है, इसलिए उन्हें लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाकर नहीं रखा जा सकता।

​मामले की अगली सुनवाई अब 3 जुलाई 2026 को होगी। तब तक तैयार की गई अंतिम सूची कोर्ट के सामने पेश करनी होगी और तब तक पूर्व में जारी अंतरिम आदेश (तबादलों पर रोक) प्रभावी रहेगा।

हाईकोर्ट प्रयागराज और शिक्षकों के समायोजन की खबर




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