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जनगणना कार्य में घोर लापरवाही पर सहायक शिक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित, विभागीय जांच के आदेश

Sir Ji Ki Pathshala

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में राष्ट्रीय और लोकहित के अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य 'जनगणना 2027' में घोर लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने तथा स्वेच्छाचारिता अपनाने के गंभीर आरोपों में एक सहायक शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार पाण्डेय द्वारा जारी इस कड़े प्रशासनिक आदेश के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

​यह मामला विकासखंड सफीपुर के कंपोजिट विद्यालय बड़ादेव का है, जहां कार्यरत सहायक शिक्षक श्री कृष्ण चन्द्र शुक्ला के खिलाफ खंड शिक्षा अधिकारी सफीपुर और तहसीलदार सफीपुर द्वारा एक संयुक्त जांच आख्या प्रस्तुत की गई थी। इस आख्या के अनुसार, राष्ट्रीय जनगणना 2027 के प्रथम चरण के कार्यों की प्रगति समीक्षा के दौरान पर्यवेक्षकों ने पाया कि उक्त शिक्षक ने अपने आवंटित क्षेत्र में जनगणना से संबंधित कोई भी कार्य अद्यतन प्रारंभ नहीं किया था। शासकीय कार्य के प्रति इस प्रकार की उदासीनता को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है।

​गंभीर आरोपों के तहत तय की गई जवाबदेही

​निलंबन आदेश के विस्तृत विवरण के अनुसार, शिक्षक पर मुख्य रूप से पांच गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख रूप से अपनी मर्जी से काम करने यानी स्वेच्छाचारी कार्यशैली अपनाने और वरिष्ठ उच्चाधिकारियों सहित खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा समय-समय पर जारी शासकीय दिशा-निर्देशों की खुले तौर पर अवहेलना करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, जनगणना जैसे बेहद महत्वपूर्ण और समयबद्ध सार्वजनिक कल्याण के कार्य में कोई रुचि न दिखाना तथा इस संबंध में बने 'जनगणना अधिनियम 1948' में निहित वैधानिक नियमों का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करना भी आरोपों का हिस्सा है। प्रशासनिक स्तर पर यह माना गया है कि शिक्षक का यह आचरण 'उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद कर्मचारी वर्ग नियमावली 1973' तथा 'कर्मचारी आचरण नियमावली 1956' के मूल प्रावधानों के पूर्णतः विपरीत है।

​निलंबन अवधि के वित्तीय नियम और प्रतिबंध

​अनुशासनात्मक कार्रवाई के अंतर्गत निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान शिक्षक श्री कृष्ण चन्द्र शुक्ला को वित्तीय नियम संग्रह खंड-2 भाग-2 के मूल नियम-53 के कड़े प्रावधानों के तहत रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें केवल नियमानुसार अर्धवेतन पर देय अवकाश के वेतन के बराबर की धनराशि ही जीवन निर्वाह भत्ते के रूप में प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त, इस अवधि के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार का महंगाई भत्ता या अन्य कोई प्रतिकर भत्ता तब तक देय नहीं होगा, जब तक कि वह इस बात का ठोस और कानूनी रूप से मान्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर देते कि वे इस दौरान किसी भी अन्य प्रकार के सेवायोजन, निजी व्यापार, वृत्ति या व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्त नहीं हैं।

उन्नाव में सहायक शिक्षक के निलंबन का आधिकारिक सरकारी आदेश पत्र 2026