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सुप्रीम कोर्ट के टीईटी फैसले पर भड़के शिक्षक: अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने दी दिल्ली कूच की चेतावनी

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने देश भर के प्राथमिक शिक्षकों के बीच असंतोष की आग भड़का दी है। इस निर्णय के विरोध में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए जल्द ही एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का साफ कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो देश भर के लाखों प्रभावित शिक्षक दिल्ली कूच करेंगे।

​चुनावी वादे और 2017 के संशोधन को रद्द करने की मांग

​संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए उनके पुराने बयानों की याद दिलाई। उन्होंने कहा: ​"शिक्षा मंत्री ने बंगाल चुनाव के दौरान सार्वजनिक रूप से वादा किया था कि यदि वे चुनाव जीतते हैं, तो शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाएगी। अब समय आ गया है कि वे अपने उस वादे को निभाएं।"

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भड़के देश भर के प्राथमिक शिक्षक।

​पांडेय ने मांग की है कि सरकार तुरंत दखल देकर साल 2017 में कानून में किए गए संशोधन को रद्द करे, जिसने सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी को अनिवार्य बना दिया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में जल्द कदम नहीं उठाए, तो राजधानी दिल्ली में एक ऐतिहासिक शिक्षक आंदोलन देखने को मिलेगा।

​'सेवारत शिक्षकों पर टीईटी थोपना अन्याय'

​इस विवाद में अब पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन के दिग्गजों का भी साथ मिल रहा है। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है।

​उन्होंने इस निर्णय को पूरी तरह एकतरफा बताते हुए कहा:

  • ​जो शिक्षक सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन पर अचानक टीईटी लागू करना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायोचित नहीं है।
  • ​यह फैसला सालों से पढ़ा रहे शिक्षकों के अनुभव और उनकी वरिष्ठता का अपमान है।

​क्या है पूरा मामला?

​सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे उन शिक्षकों के सामने संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने टीईटी परीक्षा पास नहीं की है। 2017 के नियमों के तहत सभी के लिए इसे अनिवार्य किया गया था, जिसका शिक्षक संगठन शुरुआत से ही विरोध कर रहे हैं।

​अब देखना यह होगा कि शिक्षक संघ की इस खुली चेतावनी के बाद सरकार बैकफुट पर आती है या फिर दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के बाद अब शिक्षकों का एक नया मोर्चा खुलने जा रहा है।