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शिक्षामित्रों की ग्रेच्युटी, भविष्य निधि व पेंशन पर निर्णय लेने का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), वाराणसी को आदेश दिया है कि वह शिक्षामित्रों को ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और पारिवारिक पेंशन का लाभ देने की मांग पर छह सप्ताह के भीतर नियमानुसार विचार करें और याची को सुनकर सकारण आदेश (Reasoned Order) पारित करें।

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​यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने वाराणसी की शहनाज बेगम द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया है।

​3 सप्ताह में नया प्रत्यावेदन सौंपने का आदेश

​हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए याची (शहनाज बेगम) को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के समक्ष नए सिरे से अपना प्रत्यावेदन (Representation) प्रस्तुत करें। इसके बाद बीएसए वाराणसी को अगले छह सप्ताह में इस पर अंतिम निर्णय लेना होगा।

​मुख्य कानूनी तर्क: क्यों मिलनी चाहिए शिक्षामित्रों को ये सुविधाएं?

​याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने कोर्ट के समक्ष शिक्षामित्रों की दयनीय स्थिति और उनके कानूनी अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:

  • लंबे समय से सेवा: उत्तर प्रदेश में लगभग 1.70 लाख शिक्षामित्र पिछले 25 वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में निरंतर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं।
  • कम मानदेय: शिक्षामित्रों को पहले मात्र 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब 18,000 रुपये प्रति माह किया गया है, जो उनकी लंबी सेवा के मुकाबले काफी कम है।
  • रिटायरमेंट के बाद शून्य सुरक्षा: 25 वर्षों की सेवा के बावजूद सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद उन्हें न तो कोई ग्रेच्युटी दी जा रही है और न ही पेंशन का कोई प्रावधान है।
  • आश्रितों के लिए कोई मदद नहीं: यदि किसी शिक्षामित्र की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार या उत्तराधिकारियों को सरकार की तरफ से कोई वित्तीय सहायता या पारिवारिक पेंशन नहीं मिलती।

​कानूनों और संविधान का हवाला

​अधिवक्ता ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि:

  1. ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम (Payment of Gratuity Act) और कर्मचारी भविष्य निधि कानून (EPF Act) देश के शैक्षणिक संस्थानों पर भी पूरी तरह लागू होते हैं।
  2. ​भारतीय संविधान की धारा (अनुच्छेद) 39, 42, 43 और 47 के तहत राज्य सरकार का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह दैनिक वेतन भोगी, संविदाकर्मियों और अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करे।

​यह पूरा मामला वाराणसी में कार्यरत एक शिक्षामित्र से जुड़ा है, जिनकी 48 वर्ष की आयु में असामयिक मृत्यु हो गई थी। पति के निधन के बाद उनकी पत्नी शहनाज बेगम ने परिवार के भरण-पोषण के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी से पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युटी भुगतान की मांग की थी। राहत न मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद अदालत ने शिक्षा विभाग को इस पर त्वरित निर्णय लेने का सख्त निर्देश दिया है।

​हाईकोर्ट के इस रुख से अब उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों में अपने भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।

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