Type Here to Get Search Results !

जम्मू-कश्मीर में भी अब RTE Act और NCTE मानकों के तहत होंगी शिक्षक नियुक्तियाँ

Sir Ji Ki Pathshala

जम्मू-कश्मीर में भी अब RTE Act और NCTE मानकों के तहत होंगी शिक्षक नियुक्तियाँ, सुप्रीम कोर्ट ने TET को बताया 'संवैधानिक आवश्यकता'

नई दिल्ली / श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक नियुक्तियों को लेकर 30 अप्रैल 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक युगांतकारी निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुच्छेद 370 (Article 370) के निष्प्रभावी होने के बाद, अब केंद्र सरकार के सभी शिक्षा संबंधी कानून और राष्ट्रीय मानक जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश पर भी पूरी तरह और समान रूप से लागू होंगे।

अब RTE Act और NCTE मानकों के तहत होंगी शिक्षक नियुक्तियाँ

​मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) नटराजन ने बेंच को आश्वस्त किया कि प्रदेश में अब 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' (RTE Act) पूरी तरह लागू है। इसके बाद से भविष्य की सभी शिक्षा व्यवस्थाएँ और शिक्षक नियुक्तियाँ इसी अधिनियम के कड़े मापदंडों के अनुरूप संचालित की जाएँगी।

Article 21A का दायरा सिर्फ 'प्रवेश' तक सीमित नहीं: सर्वोच्च न्यायालय

​सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में शिक्षा के अधिकार को व्यापक रूप से परिभाषित किया। अदालत ने कहा:

​"संविधान का Article 21A बच्चों को केवल 'स्कूल की चौखट लांघने' या 'दाखिला पाने' का अधिकार नहीं देता, बल्कि उन्हें 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' (Quality Education) उपलब्ध कराना भी राज्य की परम संवैधानिक जिम्मेदारी है।"

​इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पीठ ने Teacher Eligibility Test (TET) को हर शिक्षक के लिए अनिवार्य और आवश्यक माना। अदालत ने Anjuman-e-Nishat मामले के पैरा 166-170 का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि TET कोई औपचारिक पात्रता परीक्षा मात्र नहीं है, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से उपजी एक "संवैधानिक आवश्यकता" (Constitutional Necessity) है, जिससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता।

'रहबर-ए-तालीम' व्यवस्था में बड़ा बदलाव, TET के लिए मिला 3 साल का समय

​न्यायालय ने अपने फैसले में जम्मू-कश्मीर की पुरानी "रहबर-ए-तालीम" (Rehbar-e-Taleem) व्यवस्था का भी जिक्र किया, जिसके तहत पूर्व में शिक्षामित्र मॉडल की तरह मानदेय आधारित नियुक्तियाँ की जाती थीं। कोर्ट ने साफ किया कि:

  1. भविष्य की नियुक्तियाँ: अब आगे से कोई भी नियुक्ति तदर्थ (Ad-hoc) या बिना मानकों के नहीं होगी। सभी नई नियुक्तियाँ RTE Act और NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) के मानकों के तहत ही की जाएँगी।
  2. मौजूदा शिक्षकों के लिए नियम: वर्तमान में इस योजना के तहत कार्यरत शिक्षकों को अपनी सेवा में बने रहने के लिए आगामी तीन वर्षों के भीतर TET परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी

कम मानदेय पर कोर्ट संवेदनशील; राज्य सरकार से मानवीय कदम उठाने की अपेक्षा

​न्यायालय ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि रहबर-ए-तालीम योजना के अंतर्गत काम करने वाले शिक्षकों को आज के दौर में भी अत्यंत कम मानदेय (लगभग ₹3000/- महीना) मिल रहा है। इस पर गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से यह अपेक्षा की है कि वह इन शिक्षकों के मानदेय (Honorarium) और सेवा शर्तों के संबंध में एक उचित, सम्मानजनक और मानवीय व्यवस्था (Humane Arrangement) तैयार करे।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला जम्मू-कश्मीर के लाखों नौनिहालों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला है। जहाँ एक तरफ इस फैसले से घाटी के सरकारी स्कूलों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ हुआ है, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से अल्प मानदेय पर काम कर रहे शिक्षकों के लिए भी सम्मानजनक जीवन और बेहतर सेवा शर्तों की उम्मीद जगी है।

मुख्य बिंदु:

  • अनुच्छेद 370 हटने का असर: केंद्र सरकार के शिक्षा कानून और मानक अब जम्मू-कश्मीर पर भी समान रूप से लागू होंगे।
  • क्वालिटी एजुकेशन पर जोर: कोर्ट ने कहा—Article 21A सिर्फ स्कूल में दाखिले का नहीं, बल्कि 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' का अधिकार देता है।
  • 3 साल की मोहलत: वर्तमान में कार्यरत रहबर-ए-तालीम (शिक्षामित्र) शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए 3 वर्ष के भीतर TET पास करना अनिवार्य।
  • मानवीय दृष्टिकोण: ₹3000 के अल्प मानदेय पर काम कर रहे शिक्षकों की सेवा शर्तों में सुधार के लिए राज्य सरकार को निर्देश।
RTE Act और NCTE मानकों के तहत होंगी शिक्षक नियुक्तियाँ

Jammu Kashmir Teacher Recruitmen TET Mandatory