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हर ज़िले की दो तहसीलों में बनेंगे 'मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय', 18 महीने की समय-सीमा तय

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और अभूतपूर्व बदलाव करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल ‘मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय योजना’ के तहत अब प्रदेश के प्रत्येक जनपद की दो अलग-अलग तहसीलों में आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से लैस अत्याधुनिक स्कूलों का निर्माण कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय योजना शासनादेश उत्तर प्रदेश

​अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग) पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने की सख्त समय-सीमा निर्धारित की गई है।

​राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप होगी पढ़ाई

​इन विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के मानकों के अनुरूप छात्रों को प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक की गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रदान करना है। इसके तहत बच्चों को एक ही परिसर में आधुनिकतम माहौल मिलेगा, जिससे ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के बच्चों को भी बड़े शहरों जैसी वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सकेगी।

​विद्यालयों में मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएँ:

  • स्मार्ट क्लासरूम: डिजिटल और इंटरएक्टिव लर्निंग के लिए।
  • आधुनिक प्रयोगशालाएँ (Labs): विज्ञान और प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए।
  • डिजिटल पुस्तकालय: छात्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन किताबों का विशाल संग्रह देने के लिए।
  • आई.सी.टी. लैब (ICT Lab): कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी की शिक्षा के लिए।
  • खेल सुविधाएँ: विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल के मैदान और संसाधन।
  • कौशल विकास केंद्र: भविष्य की जरूरतों के हिसाब से रोजगारपरक कौशल सिखाने के लिए।
  • सुरक्षित एवं समावेशी माहौल: छात्राओं और दिव्यांग बच्चों के अनुकूल सुरक्षित वातावरण।

​जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में 'जनपद स्तरीय अनुश्रवण समिति' गठित

​परियोजना के समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए ज़िला स्तर पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो निर्माण कार्यों की निगरानी करेगी।

समिति की संरचना इस प्रकार तय की गई है:

  • अध्यक्ष: जिलाधिकारी (DM)
  • उपाध्यक्ष: मुख्य विकास अधिकारी (CDO)
  • सदस्य: जिलाधिकारी स्तर से नामित प्रथम तकनीकी अभियंता
  • सदस्य: जिलाधिकारी स्तर से नामित द्वितीय तकनीकी अभियंता
  • सदस्य: जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS)
  • सदस्य / सचिव: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA)
  • सदस्य: वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा)

​शासन द्वारा जिलाधिकारियों को जारी कड़े निर्देश

​अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में जिलाधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतें। प्रमुख निर्देश निम्नलिखित हैं:

  • समय-सीमा का पालन: निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए इसे हर हाल में निर्धारित 18 महीने के भीतर पूरा किया जाए।
  • एक ही स्थल पर भूमि: स्कूल के लिए उपलब्ध भूमि समेकित रूप से एक ही स्थान पर होनी चाहिए और आने-जाने का मार्ग पूरी तरह से अवरोधों से मुक्त होना चाहिए।
  • गुणवत्ता नियंत्रण: कार्यदायी संस्था द्वारा स्वीकृत डी.पी.आर. (DPR), ड्राइंग-डिजाइन और तकनीकी मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
  • जियो-टैग फोटोग्राफ: जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाएगा और जियो-टैग तस्वीरों के साथ प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
  • स्थानीय स्तर पर समाधान: भूमि, तकनीकी या वित्तीय मामलों से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान जिला स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा ताकि परियोजना की गति प्रभावित न हो।

​मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय योजना उत्तर प्रदेश के शैक्षिक ढांचे को बदलने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है। शासन की इस कड़ाई और नियमित मॉनिटरिंग से साफ है कि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को आधुनिक परिवेश देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस तय समय-सीमा के भीतर इन 'सुपर स्कूलों' को धरातल पर कितनी जल्दी उतार पाता है।

मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय योजना शासनादेश उत्तर प्रदेश